Friday, November 1, 2013

दीवाली के पर्व पर,बरस रहा है नूर..........................


-कुँवर कुसुमेश

दीवाली के पर्व पर,बरस रहा है नूर.
अहंकार तम का हुआ,फिर से चकनाचूर.

अन्यायी को अंत में,मिली हमेशा मात.
याद दिलाती है हमें,दीवाली की रात.

घर घर पूजे जा रहे,लक्ष्मी और गणेश.
पावन दीवाली करे,दूर सभी के क्लेश.

दीवाली का पर्व ये, पुनः मनायें आज.
और पटाखों से बचे,अपना सकल समाज।।

यश-वैभव-सम्मान में,करे निरंतर वृद्धि.
दीवाली का पर्व ये,लाये सुख-समृद्धि.
*****
शब्दार्थ: नूर=प्रकाश 

11 comments:


  1. खुबसूरत अभिवयक्ति...... शुभ दीपावली

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  2. सुन्दर प्रस्तुति-
    आभार आदरणीय-

    आप सभी को --
    दीपावली की शुभकामनायें-

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  3. बहुत सुन्दर सन्देश देती सुन्दर रचना !
    नई पोस्ट हम-तुम अकेले

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  4. सुन्दर प्रस्तुति………

    काश
    जला पाती एक दीप ऐसा
    जो सबका विवेक हो जाता रौशन
    और
    सार्थकता पा जाता दीपोत्सव

    दीपपर्व सभी के लिये मंगलमय हो ……

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  5. बहुत सुंदर बेहतरीन दोहे ,,,
    दीपावली की हार्दिक बधाईयाँ एवं शुभकामनाएँ ।।
    ==================================
    RECENT POST -: तुलसी बिन सून लगे अंगना

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  6. बहुत सुन्दर.. आप को दीपावली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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  7. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज रविवार (03-11-2013) "बरस रहा है नूर" : चर्चामंच : चर्चा अंक : 1418 पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का उपयोग किसी पत्रिका में किया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    प्रकाशोत्सव दीपावली की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  8. सच है की न्याय हमेशा जीत जाता है ... सभी दोहे सार्थक ...
    दीपावली के पावन पर्व की बधाई ओर शुभकामनायें ...

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  9. बहुत अच्छी प्रस्तुति...दीपावली की बहुत बहुत शुभकामनाएं...
    नयी पोस्ट@जब भी जली है बहू जली है

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  10. पर्वों की यह पुण्य श्रृंखला मुबारक। यश ,सुख ,शांति आपका स्पर्श बनाये रहे।

    -कुँवर कुसुमेश

    दीवाली के पर्व पर,बरस रहा है नूर.
    अहंकार तम का हुआ,फिर से चकनाचूर.

    अन्यायी को अंत में,मिली हमेशा मात.
    याद दिलाती है हमें,दीवाली की रात.

    घर घर पूजे जा रहे,लक्ष्मी और गणेश.
    पावन दीवाली करे,दूर सभी के क्लेश.

    दीवाली का पर्व ये, पुनः मनायें आज.
    और पटाखों से बचे,अपना सकल समाज।।

    यश-वैभव-सम्मान में,करे निरंतर वृद्धि.
    दीवाली का पर्व ये,लाये सुख-समृद्धि.
    *****
    शब्दार्थ: नूर=प्रकाश

    काव्य शिखर को छूती सार्थक प्रस्तुति।

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  11. वाह!!! बहुत सुंदर !!!!!
    उत्कृष्ट प्रस्तुति
    बधाई--

    उजाले पर्व की उजली शुभकामनाएं-----
    आंगन में सुखों के अनन्त दीपक जगमगाते रहें------

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