Tuesday, November 1, 2011

औषधीय गुण (दोहे)




कुँवर कुसुमेश 

औषधीय गुण वृक्ष में,मिलते हैं पर्याप्त.
मूरख करने पर तुले,इनको मगर समाप्त.

जड़ें,पत्तियाँ,फूल-फल,औषधि गुण से पूर्ण,
इनसे वैद्य बना रहे,आसव,चटनी,चूर्ण.

जड़ी-बूटियों में निहित,अद्भुत रोग निदान.
पुष्टि बराबर कर रहे,नियमित अनुसंधान.

तुलसी,हल्दी,नीम को,कहें प्रकृति उपहार.
इनके सेवन से हुआ,चंगा हर बीमार.

तन-मन-धन से कीजिये,पेड़ों का सम्मान.
इनके ही सहयोग से,सम्भव रोग निदान.
*****
 

69 comments:

  1. जड़ी-बूटियों में निहित,अद्भुत रोग निदान.
    पुष्टि बराबर कर रहे,नियमित अनुसंधान.
    तुलसी,हल्दी,नीम को,कहें प्रकृति उपहार.
    इनके सेवन से हुआ,चंगा हर बीमार...
    महत्वपूर्ण दोहे! नए अंदाज़ के साथ आपने बहुत ही सुन्दर और ज्ञानवर्धक दोहे प्रस्तुत किया है जो जानकारीपूर्ण और लाभदायक है!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

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  2. वृक्षों से मिलने वाले लाभ को कहते बहुत सुन्दर दोहे .. प्रेरक ..

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  3. बहुत उत्तम दोहे.

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  4. सुन्दर दोहे... अति सुंदर.. आपके दोहों का संसार बढ़ता जा रहा है...

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  5. वाह ! कुसुमेश जी ,
    आपने तो चंद दोहों में प्रकृति का पूरा खज़ाना उड़ेल कर रख दिया है !
    हमारे तमाम दुखों का कारण हमारा प्रकृति से दूर जाना ही है!
    पेड़ों को अपने स्वार्थ हेतु काटने वालों को शायद यह पता नहीं है कि केवल ६ महीने का अक्सिजन बनाने के लिए ३८ ट्रिलियन डालर खर्च करने पड़ते जो ये पेड़ हमें मुफ्त में देते हैं !
    प्रकृति के महत्व को रखांकित करता यह दोहा मन को छू गया !
    तन-मन-धन से कीजिये,पेड़ों का सम्मान.
    इनके ही सहयोग से,सम्भव रोग निदान
    आभार !.

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  6. सुंदर और सार्थक दोहे

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  7. हमारी प्रकृति सम्पदा की महिमा बखानते बहुत ही सुन्दर दोहे ! सच में नासमझी में ही हम इस दौलत की अवहेलना कर रहे हैं और इनके संरक्षण के प्रति उदासीन हैं !

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  8. बहुत ही सुन्दर और ज्ञानवर्धक दोहे...

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  9. वाह ...बहुत ही बढि़या ।

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  10. घणा जोरदार तालमेल।

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  11. बहुत ही सुन्दर और ज्ञानवर्धक दोहे..आभार..

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  12. जड़ी-बूटियों की कथा, कहते कवि कुसुमेश,
    इसमें जो संदेश है, फैले देश-विदेश।

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  13. bahut achcha sandesh deti hui rachna ped lagao paryavaran bachao.yeh ittefaaq hai isi vishya par aaj maine bhi kuch likha hai kal dekhiyega.kal post karungi.

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  14. बढ़िया प्रकृति वंदना है ...
    शुभकामनायें आपको !

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  15. बहुत ही सुन्दर और ज्ञानवर्धक दोहे| धन्यवाद|

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  16. बहुत ही लाजवाब लगे आपके दोहे. ये बात अगर सब लोग समझ जाएँ तो ये नौबत ही न आये के पेड़ पौधों को ढूँढना पड़े.जिस प्रकृति से इतना कुछ पाया जा सकता है उसका सम्मान भी करना हमें आना चाहिए
    आभार

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  17. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति ! हमारे लिए पौधे बहुत ही उपयोगी है !
    मेरे ब्लॉग का पता बदल गया है ! अपने दिस बोर्ड पर अपडेट होने के लिए फिर से फोल्लो करें !-www.gorakhnathomsai.blogspot.com
    www.gorakhnathbalaji.blogspot.com

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  18. बहुत बढ़िया सर जी ......

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  19. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    छठपूजा की शुभकामनाएँ!

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  20. तन-मन-धन से कीजिये,पेड़ों का सम्मान.
    इनके ही सहयोग से,सम्भव रोग निदान.
    Is baat kee nihayat zaroorat hai!

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  21. शिक्षाप्रद दोहे. सादर.

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  22. sundar dohe ...aoushdhiy paodhon ka poorn vivran..

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  23. सार्थक रचना....

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  24. अब जब घर के लोग ही इन सब चीज़ों को नहीं समझ रहे और पेड़ उजाड़ने पर तुले हुए हैं तो बाहर के लोगों से तो कोई अपेक्षा ही नहीं है..

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  25. औषधिय गुणो से भरपूर सुन्दर और सार्थक दोहे।

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  26. तुलसी,हल्दी,नीम को,कहें प्रकृति उपहार.
    इनके सेवन से हुआ,चंगा हर बीमार.

    कमाल के दोहे।
    इसे हर पर्यावरणविद को पढ़ना चाहिए।
    ... और यह संदेश तो लाजवाब और बेहद आवश्यक है ..
    तन-मन-धन से कीजिये,पेड़ों का सम्मान.
    इनके ही सहयोग से,सम्भव रोग निदान.

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  27. आयुर्वेद की पूरी रुपरेखा खींच डाली...आपने...अपने इस बहुमूल्य ज्ञान को संरक्षित करने में ये दोहे अपनी भूमिका निभायेंगे...

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  28. bahut badhiya...
    waise mai Papa se hamesha kisi na kisi medicinal plant ke bare mei ya project k bare mei sunti hi rahti hu... aaj laga jaise unke hi project ka promotional post ho...

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  29. प्रकृति से जुड़े रहने में ही लाभ है.

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  30. बहुत सुन्दर लिखा है आपने...सार्थक रचना....

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  31. जड़ी-बूटियों में निहित,अद्भुत रोग निदान.
    पुष्टि बराबर कर रहे,नियमित अनुसंधान.laabhkari dohe

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  32. तन-मन-धन से कीजिये,पेड़ों का सम्मान.
    इनके ही सहयोग से,सम्भव रोग निदान.
    बेहतरीन पर्यावरणी दोहे .
    महाकाल के हाथ पर गुल होतें हैं पेड़ ,
    सुषमा तीनों लोक की कुल होतें हैं पेड़ .
    यहाँ गुल का एक अर्थ गायब /विलुप्त /गुम होना है और दूसरा गुल यानी फूल (गुलबदन ).

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  33. कुंवर जी आपकी रचनाएँ सच में सब से हट कर और प्रेरक होती है. सीधे सादे शब्दों में आप बहुत काम की बातें बता देते हैं...आपका ये प्रयास स्तुत्य है...

    नीरज

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  34. सुन्दर और सार्थक दोहे सर,
    सादर बधाई...

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  35. तुलसी,हल्दी,नीम को,कहें प्रकृति उपहार.
    इनके सेवन से हुआ,चंगा हर बीमार.

    प्रेरक हैं सभी दोहे .. आज हम भूलते जा रहे हैं पेड़ों के उपयोग को ...

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  36. औषधिय गुणो से भरपूर सुन्दर...शिक्षाप्रद दोहे

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  37. तन-मन-धन से कीजिये,पेड़ों का सम्मान.
    इनके ही सहयोग से,सम्भव रोग निदान.
    यह है असली बात हमेशा याद रखने वाली मगर हम है की भूल जाते हैं ....

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  38. बहुत ही सुन्दर दोहे बधाई भाई कुशमेश जी

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  39. इन सुंदर दोहों से आपने पेड और प्रकृति दोनों के संवर्धन का महत्व बताया है ।

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  40. सच में इनके हि सहयोग से हमारे स्वास्थ के हर निदान सम्भव हैं.. ये औषधि बनाने वाली अंग्रेजी कम्पनियां भी इन्ही से औषधियां बनाती हैं.. और हमे मुर्ख भी|

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  41. आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल कल 3 - 11 - 2011 को यहाँ भी है

    ...नयी पुरानी हलचल में आज ...

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  42. वास्तव में प्राकृतिक तरीकों से रोग निदान साइड इफेक्ट से बचा कर अन्य परेशानियों से बचाता है बेहतरीन दोहे

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  43. बेहतरीन दोहे।

    सादर

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  44. बहुत सुंदर रचना हमेशा की तरह !

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  45. aadarniy sir
    aap kahan -kahan se vishhy chun kar laate hain .bemisaal---!aaj ke paryavaran ke sandarbh me bahut bahut hi achhi prastuti
    sadar naman
    poonam

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  46. तन-मन-धन से कीजिये,पेड़ों का सम्मान.
    इनके ही सहयोग से,सम्भव रोग निदान
    बहुत सुन्दर रचना....! सामयिक रचना...!

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  47. तुलसी,हल्दी,नीम को,कहें प्रकृति उपहार.
    इनके सेवन से हुआ,चंगा हर बीमार.

    jeevnopyogi dohe...

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  48. बहुत सुन्दर दोहे हमेशा की तरह |

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  49. प्रकृति से जुड़े रहने का अनुपम सन्देश देते हुए
    बहुत ही लाजवाब और अनुपम दोहे ...
    प्रशंसनीय ,, मननीय .

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  50. सुंदर मन की सुंदर प्रस्तुति । मेरे पोस्ट पर आपका स्वागत है । धन्यवाद ।

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  51. beautiful post, asking us to save our environment.

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  52. तुलसी,हल्दी,नीम को,कहें प्रकृति उपहार.
    इनके सेवन से हुआ,चंगा हर बीमार.

    बहुत उत्तम दोहे....

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  53. अतिउत्तम दोहे ..............

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  54. दोहों के जरिये पर्यावरण के प्रति जागरूकता का अद्भुत प्रयास! साथ ही काव्य को ज्ञान के भंडार में बदलने का अभियान! बधाई..

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  55. तुलसी,हल्दी,नीम को,कहें प्रकृति उपहार.
    इनके सेवन से हुआ,चंगा हर बीमार.
    peda podhon ke gun ko batate hue shaandaar dohe.bahut badhaai aapko.
    मुझे ये बताते हुए बड़ी ख़ुशी हो रही है , की आपकी पोस्ट आज की ब्लोगर्स मीट वीकली (१६)के मंच पर प्रस्तुत की गई है /आप हिंदी की सेवा इसी तरह करते रहें यही कामना है /आपका
    ब्लोगर्स मीट वीकली के मंच पर स्वागत है /आइये और अपने विचारों से हमें अवगत करिए / जरुर पधारें /

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  56. मेरे नये पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/

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  57. सार्थक,संदेशपूर्ण व उपयोगी जानकारी देते दोहे,आभार !

    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है,कृपया अपने महत्त्वपूर्ण विचारों से अवगत कराएँ ।
    http://poetry-kavita.blogspot.com/2011/11/blog-post_06.html

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  58. बहुत सुंदर और ज्ञानवर्धक दोहे...आभार

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  59. वनस्पति के औषधीय गुणों की जानकारी के साथ वनस्पति रक्षा का सुंदर संदेश.

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  60. तुलसी,हल्दी,नीम को,कहें प्रकृति उपहार.
    इनके सेवन से हुआ,चंगा हर बीमार.

    तन-मन-धन से कीजिये,पेड़ों का सम्मान.
    इनके ही सहयोग से,सम्भव रोग निदान.
    poojya rahen hain hamaare ye purkhe ped .

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  61. तन-मन-धन से कीजिये,पेड़ों का सम्मान.
    इनके ही सहयोग से,सम्भव रोग निदान.

    पेड़ों के प्रति चेतना प्रदान करती आपकी अनुपम प्रस्तुति
    के लिए बहुत बहुत आभार जी.

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  62. ha sriman ye to atut satya h. ki ped hamare jivan data h,,,,,,,,,,,,,,,,,

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