Thursday, March 28, 2013

ज़ुल्म होने न दें ग़रीबों पर..........



-कुँवर कुसुमेश 

फ़र्ज़ बनता है ये अदीबों पर. 

ज़ुल्म होने न दें ग़रीबों पर. 

इब्ने-मरियम की तर्ज़ पर चाहे,

झूल जाना पड़े सलीबों पर. 
*****
शब्दार्थ:
अदीबों=साहित्यकारों,
इब्ने-मरियम=मरियम का बेटा/ईसा मसीह 
सलीब=सूली

14 comments:

  1. गुड फ्राइडे पर सुंदर पोस्ट...आभार!

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  2. फ़र्ज़ बनता है ये अदीबों पर.

    ज़ुल्म होने न दें ग़रीबों पर.

    इब्ने-मरियम की तर्ज़ पर चाहे,

    झूल जाना पड़े सलीबों पर.

    BEST LINES ON GOOD FRIDAY

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  3. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार (30-3-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
    सूचनार्थ!

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  4. कलम के सिपाही अगर सो गए
    तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे...

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  5. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

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  6. बहुत सुन्दर।।
    पधारें कैसे खेलूं तुम बिन होली पिया...

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  7. वाह ... लाजवाब मुक्तक ... प्रभावी ....

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  8. sir mere blog ko bhi apne friend tk pahunchaye aapki post mujhe dil se bahut achi lgi mujhe yakin h ki aap meri help jarur karenge mere blog ka pta h
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