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Friday, September 25, 2015

पुराने वक़्त की जागीर है ये.................


पुराने वक़्त की जागीर है ये। 
सफ़े पर ख़्वाब की ताबीर है ये। 
इसे रक्खा बड़ी हिकमत से मैंने,
जवानी की मेरी तस्वीर है ये। 
-कुँवर कुसुमेश 

Friday, September 4, 2015

कन्हैया आ भी जाओ...............


मधुर-सी तान पे मुरली बजैय्या आ भी जाओ। 
कि ताक़तवर हुआ अब तो रुपैया आ भी जाओ।
बचाये जालिमों से कौन हम सब को मेरे कान्हा, 
भरे हैं कंस दुनिया में कन्हैया आ भी जाओ ।
 

श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें 
-कुँवर कुसुमेश 

Monday, July 27, 2015

आखिरी सलाम कलाम साहब............................


हाज़िर है आपको आखिरी सलाम कलाम साहब :-

लाज़िमी है आँख नम होना किसी के प्यार में। 
खासकर जब आदमी अच्छा लगे व्यवहार में। । 
आपने कुछ ख़ास ही दिल में बना ली थी जगह,
आप जैसे  लोग  अब  मिलते  कहाँ संसार में। । 
-कुँवर कुसुमेश 

Wednesday, June 24, 2015

अब्र बरसे हैं.........................


लोग पानी को खूब तरसे हैं। 
तब कहीं जाके अब्र बरसे हैं। 
देर क्यों लग रही  मेरे मौला,
ख्वाब मेरे तो मुख़्तसर से हैं। 
-कुँवर कुसुमेश
 अब्र-बादल ,मुख़्तसर-थोड़े 

Friday, June 5, 2015

सभ्यता गई..........................


आगे बढ़ती पीढ़ी अपने-अपने ही रास्ता गई। 
पिछली पीढ़ी से क्या लेना दुनिया को ये बता गई। 
कल तक तो सभ्यता के कारण भारत का सर ऊँचा था,
बॉय फ्रेंड और गर्ल फ्रेंड के चक्कर में सभ्यता गई। । 
-कुँवर कुसुमेश 

Saturday, April 25, 2015

ज़लज़ला


मतलबी इंसान है मतलब में अपनी मुब्तला। 
बारहा पर्यावरण को चोट पहुँचता चला।। 
इसमें क़ुदरत का ज़रा भी दोष हो ऐसा नहीं,
आदमी की भूल का परिणाम है ये ज़लज़ला।। 
-कुँवर कुसुमेश 

Tuesday, March 31, 2015

अजीब चीज़ बनाई है व्हाट्स अप...............


हर आदमी मोबाइल की माला रहा है जप। 
घर के ज़रूरी  काम भी होने लगे हैं ठप।। 
कैसे सुबह से शाम हुई कुछ पता नहीं,
ऐसी अजीब चीज़ बनाई है व्हाट्स अप।। 
-कुँवर कुसुमेश 

Saturday, March 14, 2015

जाड़ा कब तक है.........................



आधा मार्च खत्म है फिर भी ठंडक है। 

अब कहना मुश्किल है जाड़ा कब तक है।। 

लेकिन अबकी फूल खिले हैं अति सुन्दर,

अबकी हरियाली तो यार चकाचक है।। 

-कुँवर कुसुमेश

Wednesday, November 19, 2014

गेहूं के जवारे से..................................


डरना न कभी यारो किस्मत के सितारे से। 

मरता नहीं है कोई तक़दीर के मारे से।। 

सेहत बनेगी फिर से बीमारे-कैंसर की,।

ताकत मिलेगी इतनी गेहूं के जवारे से।। 

-कुँवर कुसुमेश 

एक गुज़ारिश.....................


जब भी जाड़ों में बाहर चला कीजिये,
कुछ पुराने-से कपड़े रखा कीजिये।
ठण्ड से कंपकांपता जो कोई दिखे,
प्लीज,उसको ये कपड़े दिया कीजिये।
-कुँवर कुसुमेश 

Tuesday, November 18, 2014

लखनऊ सबसे है ठंडा..............


लोग सड़कों के किनारे। 
ओस में सोते बेचारे।। 
लखनऊ सबसे है ठंडा,
कह रहे अखबार सारे।। 
-कुँवर कुसुमेश

Thursday, October 30, 2014

काला धन पे शोर शराबा है बहुत.................



वो भी अमृत-सा नज़र आयेगा जो विष होगा। 

हरिक जिरह पे कभी दैट कभी दिस होगा। 

मसला-ए-काला धन पे शोर शराबा है बहुत,

अन्त में देखना सब टाँय टाँय फिश होगा। 

-कुँवर कुसुमेश

Thursday, October 16, 2014

हुदहुद के तेवर................................



लग रहा हुदहुद के तेवर कुछ तो ढीले पड़ गए। 

थी अकड़ जिसमें बहुत वो भी लचीले पड़ गए। 

आज थोड़ी गुनगुनी-सी धूप आयी है नज़र,

चेहरा-ए हुदहुद के देखो रंग पीले पड़ गए।।

-कुँवर कुसुमेश

Thursday, October 9, 2014

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस................


माना की हालात कठिन हैं,पग पग पर मजबूरी है। 

मन को रक्खो शान्त,तुम्हारी इच्छा भले अधूरी है।

सीज़ोफ्रेनिक मत बन जाना,यह दिमाग का रोग जटिल,  

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर इतना अहद ज़रूरी है। 

-कुँवर कुसुमेश 

Wednesday, October 1, 2014

गांधी जी.................


छोड़ गये तुम सब कुछ जैसा गांधी जी। 

आज नहीं है वो सब वैसा गांधी जी।

मानवता को कुचल दिया है पैसे ने,

सब से बढ़ करके है पैसा गांधी जी।

-कुँवर कुसुमेश

Monday, September 29, 2014

एक अक्टूबर.................


मान जो भी मिल रहा वो नौजवाँ तेवर को है। 

अब बुजुर्गों का तो बस सम्मान कहने भर को है। 

पल रहे वृद्धाश्रम में जाने कितने वृद्ध जन ,

सीनियर सिटीजन दिवस यूँ एक अक्टूबर को है। 

-कुँवर कुसुमेश 

Monday, September 15, 2014

अच्छा मौसम है...............................


मौसम में गर्मी कुछ कम है। 
पहले से अच्छा मौसम है। । 
शायद जाड़ा जल्दी आये ,
इस आशंका में भी दम है। ।
-कुँवर कुसुमेश

Tuesday, August 26, 2014

न बिजली है,न पानी है........................




ये कैसी दुर्व्यवस्था है,ये कैसी हुक्मरानी है। 

जिधर भी देखिये जाकर न बिजली है,न पानी है। 

जो कहता हूँ किसी नेता से जा करके मैं ये बातें,

तो वो कहता है हँस करके यही तो ज़िन्दगानी है।

-कुँवर कुसुमेश

Saturday, August 23, 2014

दोस्ती करना संभल कर.............................


दोस्ती में भी छलावा अब है अक्सर दोस्तों। 

छल रहे हैं लोग अक्सर दोस्त बनकर दोस्तों। 

आई डी फर्जी बना कर भी चले आते हैं लोग,

फेसबुक पर दोस्ती करना संभल कर दोस्तों। 

-कुँवर कुसुमेश 

Sunday, August 17, 2014

कन्हैया जन्म लो जल्दी..........................


भरे हैं कंस दुनिया में कन्हैया जन्म लो जल्दी।

यहाँ पग पग पे चीरों के हरैया जन्म लो जल्दी।

है नैतिकता से बढ़ करके रुपैया जन्म लो जल्दी।

मुसीबत में तुम्ही सब के बचैया जन्म लो जल्दी।

-कुँवर कुसुमेश