Friday, July 17, 2015

हुक्मे-रब्बी है........................


हुक्मे-रब्बी है, हमें राह पे लाने के लिये । 
ये महज़ रस्म नहीं सिर्फ निभाने के लिये। 
प्यार से ईद मनाना है गले मिल-जुल कर,
चाँद निकला है हमें इतना बताने के लिये।
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 ईद मुबारक हो 
-कुँवर कुसुमेश  
हुक्मे-रब्बी=ईश्वरीय आदेश 

4 comments:

  1. ईद मुबारक..

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (19-07-2015) को "कुछ नियमित लिंक और एक पोस्ट की समीक्षा" {चर्चा अंक - 2041} पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. प्यार से ईद मनाना है गले मिल-जुल कर,
    चाँद निकला है हमें इतना बताने के लिये।

    गज़ब का शेर. ईद आपको भी मुबारक.

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