Wednesday, October 21, 2015

मायावी रावण....................


विजयादशमी की हार्दिक बधाई के साथ हाज़िर है एक दोहा :- 

मायावी रावण कहाँ,जलकर हुआ है राख। 

ज़िन्दा है इन्सान में,अब भी वो गुस्ताख़। 

-कुँवर कुसुमेश 

1 comment:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (23.10.2015) को "शुभ संकल्प"(चर्चा अंक-2138) पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।
    विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ, सादर...!

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