Thursday, December 1, 2011

ध्वनि प्रदूषण पर दोहे




कुँवर कुसुमेश 

धुआँ उगलती चिमनियाँ,वाहन करते शोर.
समय पूर्व ले जा रहे,मृत्यु द्वार की ओर.

ध्वनि निषिद्ध परिक्षेत्र हैं,कोलाहल से ग्रस्त.
अस्पताल भी हो रहे,आज शोर से त्रस्त.

पैदा करती तीव्र ध्वनि, कई मानसिक रोग.
अतिशय ध्वनि उपकरण का,वर्जित हो उपयोग.

डेसीबल से तीव्रता,ध्वनि की आँकी जाय .
पैंतालिस डेसी० तलक, ध्वनि कानों को भाय.

धूल-धुआँ-ध्वनि आज यदि,निभा रहे हैं साथ.
चलो प्रदूषण से करें,हम भी दो-दो हाथ.
*****

81 comments:

  1. बहुत सुंदर दोहे साथ में जानकारी भी बहुत बहुत आभार

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  2. ध्वनि निषिद्ध परिक्षेत्र हैं,कोलाहल से ग्रस्त.
    अस्पताल भी हो रहे,आज शोर से त्रस्त.
    पैदा करती तीव्र ध्वनि, कई मानसिक रोग.
    अतिशय ध्वनि उपकरण का,वर्जित हो उपयोग...
    वाह! बहुत खूब लिखा है आपने! सटीक पंक्तियाँ! सुन्दर सन्देश देती हुई जानकारी से भरपूर इस शानदार दोहे के लिए हार्दिक बधाइयाँ !
    http://seawave-babli.blogspot.com
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com

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  3. अद्भुत कुंवर साहब!

    विज्ञान, साहित्य का ऐसा अनोखा संगम बहुत ही कम देखने को मिलता है।

    हम तो इस विषय पर शोध किए हुए हैं ... काश कि ये दोहे मुझे उन दिनों मिल गए होते जब मैं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में काम करता था। लोगों को जागरूक करने में इनका बहुत प्रभावकारी उपयोग होता।

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  4. धूल-धुआँ-ध्वनि आज यदि,निभा रहे हैं साथ.
    चलो प्रदूषण से करें,हम भी दो-दो हाथ.
    बहुत अच्छा संदेश ...

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  5. ध्वनि प्रदूषण के खतरों पर आपने बड़े ही सुन्दर दोहे रचे हैं ! आशा है इनसे कुछ ना कुछ जागरूकता तो अवश्य ही आयेगी ! वर्तमान सन्दर्भों में इस सामयिक एवं प्रासंगिक प्रस्तुति के लिये आपको बधाई !

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  6. धुआँ उगलती चिमनियाँ,वाहन करते शोर.
    समय पूर्व ले जा रहे,मृत्यु द्वार की ओर.

    ध्वनि निषिद्ध परिक्षेत्र हैं,कोलाहल से ग्रस्त.
    अस्पताल भी हो रहे,आज शोर से त्रस्त.
    Sach kah rahe hain! Yahee aaj kalke halaat hain!
    Bahut badhiya rachana!

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  7. क्या बात है!! बहुत सुन्दर दोहे हैं.

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  8. इस गंभीर विषय पर सुन्दर दोहे...जागरूकता फैलाते हुए... बहुत बढ़िया

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  9. धुआँ उगलती चिमनियाँ,वाहन करते शोर.
    समय पूर्व ले जा रहे,मृत्यु द्वार की ओर.
    बहुत बढ़िया ,सार्थक और सामयिक

    डेसीबल से तीव्रता,ध्वनि की आँकी जाय .
    पैंतालिस डेसी० तलक, ध्वनि कानों को भाय.
    विशेष्कर ये दोहा तो जानकारी भी देता है

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  10. आपके यह प्रयोग अद्भुत हैं !
    शुभकामनायें आपको !

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  11. ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ आवाज बुलंद करते सार्थक दोहे।

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  12. प्रदूषण पर बहुत ही मारक दोहे !
    आभार !

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  13. धुआँ उगलती चिमनियाँ,वाहन करते शोर.
    समय पूर्व ले जा रहे,मृत्यु द्वार की ओर.

    Bahut Badhiya...Ekdam Sateek Dohe....

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  14. bahut umda prastuti, rachna ki sarthakta ko sidh kerti hui aaj ke paridrasya pe gambhir rachna
    bahut bahut badhai

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  15. बहुत अच्छा संदेश देते हुए दोहे...
    प्रदूषण पर मेरी रचना नीचे की लिंक पर देखने की कृपा करें..

    http://hindihaiga.blogspot.com/2011/11/blog-post_23.html#comment-form

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  16. पर्यावरणीय समस्‍याओं पर आपके दोहे पढकर घाघ की कहावतें याद आ गईं। बढि़या दोहे।

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  17. सार्थक पोस्ट!

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  18. सही कहा आपने ..|

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  19. सार्थक संदेश देती हुई रचना ..

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  20. सार्थक सन्देश हैं सर दोहों में... पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता आज की महती आवश्यकता है...
    सादर

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  21. धूल-धुआँ-ध्वनि आज यदि,निभा रहे हैं साथ.
    चलो प्रदूषण से करें,हम भी दो-दो हाथ.
    सार्थक दोहे आभार

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  22. सार्थक सन्देश देते बहुत सुंदर दोहे...आभार

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  23. कुंवर जी...
    बहुत सार्थक सन्देश बसे हैं आपकी पंक्तियों में. लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए आभार.

    www.belovedlife-santosh.blogspot.com

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  24. इन दोहों में प्रदूषण की समस्या को सार्थक रूप से उठाया है ... सुन्दर और सन्देश देती प्रस्तुति

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  25. बहुत ही सार्थक व सटीक लेखन ...आभार ।

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  26. अद्भुत भाव !!!
    विकराल समस्या पर सार्थक लेखन है आपका.

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  27. ज्ञानवर्धक आनुप्रयासिक प्रस्तुति आलंकारिक मनोहर .

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  28. बहुत सुन्दर सार्थक दोहे हैं...आभार

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  29. 'कविता वही जो कल्याण की बातें करे' को सार्थक करते सुन्दर दोहे ...

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  30. प्रदूषण भी कृतार्थ हुआ होगा...किसी ने उसे दोहों के लायक तो समझा...सटीक दोहे...

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  31. क्या बात है । आपेक पोस्ट ने बहुत ही भाव विभोर कर दिया । मेरे नए पोस्ट पर आपका आमंत्रण है ।

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  32. Kunwar ji!...Congrats on writing such meaningfuls 'Dohe'!

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  33. बहुत खूब सर .
    आपने एक बेहद विचारणीय मुद्दे को उठाया है.

    सादर.

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  34. ध्वनि निषिद्ध परिक्षेत्र हैं,कोलाहल से ग्रस्त.
    अस्पताल भी हो रहे,आज शोर से त्रस्त.

    पैदा करती तीव्र ध्वनि, कई मानसिक रोग|
    अतिशय ध्वनि उपकरण का,वर्जित हो उपयोग ||ध्वनि प्रदूषण पर दोहे ati ututam hai

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  35. सार्थक प्रस्तुति। मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है । आभार.।

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  36. ख़ूब कहा है कुसुमेश जी. काव्यात्मक चेतावनियाँ हैं मनभावनियाँ.

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  37. बहुत ख़ूबसूरत , सुन्दर भाव, सादर.

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  38. आप की पोस्ट ब्लोगर्स मीट वीकली (२०) के मंच पर प्रस्तुत की गई है /कृपया वहां आइये और अपने विचारों से हमें अवगत करिए /आप हिंदी भाषा की सेवा इसी लगन और मेहनत से करते रहें यही कामना है / आभार /link

    http://hbfint.blogspot.com/2011/12/20-khwaja-gareeb-nawaz.html

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  39. विज्ञान में साहित्य का यह प्रवेश पुरस्कार-योग्य है।

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  40. मेरे नये पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/
    http://seawave-babli.blogspot.com/

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  41. डेसीबल से तीव्रता,ध्वनि की आँकी जाय .
    पैंतालिस डेसी० तलक, ध्वनि कानों को भाय
    sahi likha hai
    sunder
    badhai
    rachana

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  42. धुआँ उगलती चिमनियाँ,वाहन करते शोर.
    समय पूर्व ले जा रहे,मृत्यु द्वार की ओर.

    प्रदूषण के विषय को लेकर अद्भुत रचना प्रस्तुत की है आपने. बेहद संवेदनशील विचारणीय और सामायिक पोस्ट. बधाई.

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  43. बहुत सुन्दर सार्थक दोहे ...

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  44. बहुत सुंदर रचना ...
    शुभकामनायें आपको !

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  45. अति उत्तम .... आनंद आ गया पढ़ के सभी दोहे ... सामयिक ... ध्वनि प्रदुषण की समस्या को सही जोरदार तरीके से उठाया है आपने कुंवर जी ..

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  46. सामयिक और सुन्दर दोहे

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  47. कुसुमेश जी,...
    सामायिक बहुत सुंदर दोहे,
    बहुत सुंदर पन्तियाँ क्या बात है...बधाई
    मेर पोस्ट नए पर आइये,....

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  48. क्या लिखुं कैसै लिखि लिखा नही कुछ जाय...............
    तुलसी ऐसे जीव को और अकल दी जाय......
    जगाने....चेताने वाली रचनाएं
    सादर
    यशोदा

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  49. मैं दिनेश पारीक आज पहली बार आपके ब्लॉग पे आया हु और आज ही मुझे अफ़सोस करना पड़ रहा है की मैं पहले क्यूँ नहीं आया पर शायद ये तो इश्वर की लीला है उसने तो समय सीमा निधारित की होगी
    बात यहाँ मैं आपके ब्लॉग की कर रहा हु पर मेरे समझ से परे है की कहा तक इस का विमोचन कर सकू क्यूँ की इसके लिए तो मुझे बहुत दिनों तक लिखना पड़ेगा जो संभव नहीं है हा बार बार आपके ब्लॉग पे पतिकिर्या ही संभव है
    अति सूंदर और उतने सुन्दर से अपने लिखा और सजाया है बस आपसे गुजारिश है की आप मेरे ब्लॉग पे भी आये और मेरे ब्लॉग के सदशय बने और अपने विचारो से अवगत करवाए
    धन्यवाद
    दिनेश पारीक

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  50. ध्वनि प्रदुषण की वैज्ञानिक सोच के साथ सराहनीय प्रस्तुति ....बधाई

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  51. प्रदूषण से सचमुच दोचार हाथ करने की तीव्र आवश्यकता है ।
    आपके दोहे सामयिक और सटीक है वायू प्रदूषण, जल प्रदूषण और भूमि प्रदूषण सबसे त्रस्त हैं हम पर पहल कोई नही करता इस से दो चार होने की ।

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  52. पर्यावरणी दोहे रचना काव्य कर्म के अलावा जन शिक्षण है .बधाई .शोर तो धमनियों को भी संकरा बना रहा है श्रवण ह्रास तो है ही .डिस्को और डी जे के दौर में कोई इस और ध्यान नहीं दे रहा है .

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  53. सही कहा आपने ....
    सभी सचेत होंगे तभी कुछ हो सकता है....!!

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  54. बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।
    मेरा शौक
    मेरे पोस्ट में आपका इंतजार है,
    आज रिश्ता सब का पैसे से

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  55. बहुत अच्छी रचना,..

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  56. AAj itna shor hei duniya mein ki kah nahi sakte

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  57. ऐसे दोहे जनमानस को सचेत करते हैं ! उल्लेखनीय दोहे !

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  58. इस पोस्ट के लिए धन्यवाद । मरे नए पोस्ट :साहिर लुधियानवी" पर आपका इंतजार रहेगा ।

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  59. bahut khoob Bauji...
    pradooshan ko naye shabd...

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  60. सचेतक सुंदर दोहे,..बेहतरीन रचना ...
    मेरी नई रचना .........
    नेताओं की पूजा क्यों, क्या ये पूजा लायक है
    देश बेच रहे सरे आम, ये ऐसे खल नायक है,
    इनके करनी की भरनी, जनता को सहना होगा
    इनके खोदे हर गड्ढे को,जनता को भरना होगा,

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  61. मेरे नये पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/
    http://seawave-babli.blogspot.com/

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  62. waah kushumesh ji bahut achha sandesh hai aapki rachna me,........

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  63. bahut badiya mudda uthaya hai aapne in dohon ke madhyam se..

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  64. मेरे नये पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/
    http://seawave-babli.blogspot.com/

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  65. धूल-धुआँ-ध्वनि आज यदि,निभा रहे हैं साथ.
    चलो प्रदूषण से करें,हम भी दो-दो हाथ.

    sakaratmak rachna aur prayas....

    bhrashtachar se jyada mahatwapurn hai pradushan ko rokna.....

    super like to this one...:)

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  66. ध्वनि निषिद्ध परिक्षेत्र हैं,कोलाहल से ग्रस्त.
    अस्पताल भी हो रहे,आज शोर से त्रस्त.
    bahut achchi rachna ...aabhar
    welcome to my blog :)

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