Tuesday, August 7, 2012

उनको थी राजनीति से हरवक्त एलर्जी.............



मैं तो बड़ा निराश हूँ अन्ना की टीम से.
इस दर्जा पलट जायेंगे सोंचा कभी न था.
उनको थी राजनीति से हरवक्त एलर्जी.
उनकी नज़र में काम ये अच्छा कभी न था.
                                     -कुँवर कुसुमेश 

34 comments:

  1. सर जी अनशन के बाद कूटनीति इसे ही कहते है

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  2. Pata nahee ab is neetee ko kya kaha jaye!

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  3. मुझे लगा था...सत्ता को एक मजबूत विपक्ष मिला है...जनता का...और सब विधेयक यहाँ से सहमति के बाद ही पारित होंगे...पर होने और लगने में अंतर होता है...

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  4. वक्त वक्त की बात है............

    सादर
    अनु

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  5. राजनीति में अनसन भी एक नीति है और इसी नीति का परिणाम है चुनाव में भागीदार होना,,,देखते जाइए आगे२ होता है क्या,,,,

    RECENT POST...: जिन्दगी,,,,

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  6. बहुत सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति.ब्लॉग जगत में आपकी प्रस्तुति संग्रहणीय है.आभार.anna teem:vahin nazar aayegi

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  7. सीधी ऊंगली से न निकले घी तब क्या किया जाए ... .कृपया यहाँ भी पधारें -

    ram ram bhai
    मंगलवार, 7 अगस्त 2012
    भौतिक और भावजगत(मनो -शरीर ) की सेहत भी जुडी है आपकी रीढ़ से

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  8. mere vichar se anna ka nirnay bilkul sahi hai. andolan ab doosre charan me'n pravesh kar raha hai.

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  9. सही कहा आपने कुसुमेश जी. लेकिन अब देखते हैं कि 'विषस्य विषमौषधम्' वाली बात क्या यहाँ भी सच होती है.

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  10. राजनीती इसी को कहते हैं. आगे - आगे देखते जाइये क्या - क्या होता है...

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  11. अन्ना के पलटने से बहुत लोग निराश हुये हैं ...

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  12. इकसठ सठ सेठा भये, इक सठ आये और |
    वा-सठ सड़-सठ गिन रहे, लेकिन करिए गौर |


    लेकिन करिए गौर, चौर की चर्चा चालू |
    किस के सिर पर मौर, दौर चालू जब टालू |


    लाखों भरे विभेद, चुनौती बहुत बड़ी है |
    दुर्जन रहे खरेद, व्यवस्था सड़ी पड़ी है ||

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    1. राष्ट्र कार्य करने चले, किन्तु मृत्यु भय साथ |
      लगा नहीं सकते गले, फिर ओखल क्यूँ माथ ?

      फिर ओखल क्यूँ माथ, माथ पर हम बैठाए |
      देते पूरा साथ, हाथ हर समय बढाए |

      आन्दोलन की मौत, निराशा घर घर छाई |
      लोकपाल की करें, आज सब पूर्ण विदाई ||

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  13. सही कहा ..अन्ना और उनकी टीम से. हमें भी बहुत निराशा मिली..

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  14. और रास्ता भी क्या था ? खुद सत्ता मे आ के लोकपाल बनाना अच्छा है न ,इस तरह कब तक चलता .

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  15. सच कहा सर आपने...
    निराशा तो है लेकिन चलो साथ चलें... देखें....

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  16. अब देखते हैं आगे क्या होता है ...

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  17. यहाँ हर शख्स बेईमान नज़र आता है
    मुझे ही मेरा अनजान नज़र आता है

    मन वचन और कर्म से आप समर्पित हैं मैं आपको अच्छा रहने दूं तब न

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  18. आपकी पोस्ट कल 9/8/2012 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें

    चर्चा - 966 :चर्चाकार-दिलबाग विर्क

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  19. निराश न होईयेगा कुश्मेश जी
    आगे आगे देखिये होता है क्या.

    श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ.

    समय मिलने पर मेरे ब्लॉग पर आकर
    'फालोअर्स और ब्लोगिंग'के सम्बन्ध में मेरा मार्ग दर्शन कीजियेगा,

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  20. कृष्ण जन्म अष्टमी पर हार्दिक शुभ कामनाएं |
    आशा

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  21. मैं तो बड़ा निराश हूँ अन्ना की टीम से.जब जब जो जो होना है तब तब सो सो होता है
    इस दर्जा पलट जायेंगे सोंचा कभी न था.
    उनको थी राजनीति से हरवक्त एलर्जी.
    उनकी नज़र में काम ये अच्छा कभी न था.
    -कुँवर कुसुमेश
    बृहस्पतिवार, 9 अगस्त 2012
    औरतों के लिए भी है काइरोप्रेक्टिक चिकित्सा प्रणाली
    औरतों के लिए भी है काइरोप्रेक्टिक चिकित्सा प्रणाली

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  22. बिल्‍कुल सही कहा है आपने ... आभार

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  23. अन्ना तो अभी भी कह रहे हैं की वो खुद चुनाव नहीं लड़ेंगे और जन जागरण के लिए घूम घूम कर लोगों को जाग्रत करेंगे --------आगे वक़्त बतायेगा क्या होगा पर भ्रष्टाचार के खिलाप जो ज्योति उन्होंने जलाई है वो भी बहुत बड़ी बात है अब आम जनता को भी तो कुछ करना चाहिए

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  24. शानदार कटाक्ष ....

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  25. अब देखते हैं आगे क्या होता है .......
    श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ....

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  26. जो सोचा ना जाय वही राजनीति है.

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  27. होने और लगने में अंतर होता है.......

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  28. दिक्कत यह है कुंवर कुसुमेश जी इस देश में राजनीति के बिना अब एक पत्ता भी नहीं हिलता ,हवा भी सोनिया जी से पूछ के चलती है ...चुप्पा भी उनकी चुप्पी से शर्मा जाता है ....आदमी करे तो क्या करे ...?कृपया अगली पोस्ट फाइबरो -मायाल्जिया का भी इलाज़ है काइरोप्रेक्टिक म...ज़रूर पढ़ें .शुक्रिया आपकी टिपण्णी के लिए जो हमारे लिए बेहद महत्व लिए रहतीं हैं आंच मुहैया करवातीं हैं लेखन को .

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  29. समय समय का फेर है ... लगता है राजनीति के बिना आज कुछ भी संभव नहीं ...

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