Friday, September 25, 2015

पुराने वक़्त की जागीर है ये.................


पुराने वक़्त की जागीर है ये। 
सफ़े पर ख़्वाब की ताबीर है ये। 
इसे रक्खा बड़ी हिकमत से मैंने,
जवानी की मेरी तस्वीर है ये। 
-कुँवर कुसुमेश 

4 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (27-09-2015) को "सीहोर के सिध्द चिंतामन गणेश" (चर्चा अंक-2111) (चर्चा अंक-2109) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. वह्ह क्या बात है..हमने भी इन यादो को सम्भाल कर रखा है....शुभकामनाएं

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  3. बहुत सुन्दर।

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  4. बहुत-खूब...फोटोग्राफर: हेमंत मोढ़ के दिल की बात..बंया करदी आपने
    मैंने अपने ब्लॉग पर लिखा है, तस्वीरों में बसी यादें...www.hemantmodh.com

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