Friday, January 28, 2011


खुशबू बसंत की


कुँवर कुसुमेश 

चारो तरफ़ से आयेगी खुशबू बसंत की,
बादे-सबा भी लायेगी खुशबू बसंत की.

रंगीनिये-हयात की खुशबू संभल ज़रा,
तुझको भी आज़मायेगी खुशबू बसंत की.

जिसका चला गया कहीं महबूब छोड़कर,
उसको न रास आयेगी खुशबू बसंत की.

अच्छा है दोस्तों के तसव्वर में डूबना,
यादों में सिमट जायेगी खुशबू बसंत की.

राहे-वफ़ा में प्यार,मुहब्बत की तर्ज़ पर,
रह रह के गुनगुनायेगी खुशबू बसंत की.

गुज़रे हुए बरस से अधिक इस बरस 'कुँवर',
खुशियाँ लुटा के जायेगी खुशबू बसंत की.
**************
बादे-सबा=सुबह की हवा, रंगीनिये-हयात=ज़िन्दगी की रंगीनी 
राहे-वफ़ा= वफ़ा की राह 

90 comments:

  1. अच्छा है दोस्तों के तसव्वर में डूबना,
    यादों में सिमट जायेगी खुशबू बसंत की.

    राहे-वफ़ा में प्यार,मुहब्बत की तर्ज़ पर,
    रह रह के गुनगुनायेगी खुशबू बसंत की.


    जरुर यह बसंत कुछ नया रंग दिखलायेगा ....हर शेर एहसासों से भरा ...आपका शुक्रिया

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  2. बहुत ही खूबसूरत गजल है । प्रत्येक शेर बसंत की खूशबू से सरोवार ।
    आभार बावू जी ।

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  3. गुज़रे हुए बरस से अधिक इस बरस 'कुँवर',
    खुशियाँ लुटा के जायेगी खुशबू बसंत की.
    Bahut khoobsoorati se likhi khoobsoorat rachna...
    Basanti kar gai poore mahol ko.....

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  4. बहुत सुंदर रचना. धन्यवाद

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  5. गणतंत्र दिवस को तिरंगा फहरा करके-
    मैं बसंत की खुशबू से नहा गया हूँ।
    राहे-वफ़ा में प्यार, मुहब्बत की तर्ज़ पर
    जो कहीं नहीं पाया, यहाँ पा गया हूँ॥
    ---------------------------------------------------
    नाजुक शेरों से लबरेज गजल के लिए बधाई।
    सद्भावी - डॉ० डंडा लखनवी

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  6. पिछले कुछ दिनों से काफी गहमा गहमी चल रही है ब्लॉग जगत पे...
    उसके बीच बड़ी प्यारी कविता.....
    सौंदर्य लिए हुए.....
    स्वागत ऋतुराज...स्वागत...

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  7. बेहतरीन ग़ज़ल.... उम्दा रचना आभार

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  8. रंगीनिये-हयात की खुशबू संभल ज़रा,
    तुझको भी आज़मायेगी खुशबू बसंत की.
    क्या बात है!!
    ग़ज़ब!!!
    टिप्पणी तो बाद में, पहले इस शे’र का मज़ा लेने दीजिए।
    आपको यूंही नहीं मैं ब्लॉग जगत का ग़ज़लों का बादशाह कहता हूं।

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  9. जिसका चला गया कहीं महबूब छोड़कर,
    उसको न रास आयेगी खुशबू बसंत की.
    सर जी, क्या दर्द सारा निचोड़ डाला है। !!!

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  10. दिल के दर्द को अचछी तरह से प्रस्तुत किया है आपने।संवेदनशील पोस्ट।

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  11. राहे-वफ़ा में प्यार,मुहब्बत की तर्ज़ पर,
    रह रह के गुनगुनायेगी खुशबू बसंत की.
    और ये, शाश्वत सत्य है!!
    मुझे ग़ज़ल के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं है, वरना इसको आंच पर लेता। देखता हूं अपनी टीम में कोई कुछ कर पाएगा या नहीं।

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  12. कुंवर जी आपकी ये ग़ज़ल तो बस गाता ही जा रहा हूं। इस ग़ज़ल में आपकी गहरी संवेदना, अनुभव और अंदाज़े बयां खुलकर प्रकट हुए हैं। इसकी शायरी सलीक़ेदार, प्रखर, प्रवाहपूर्ण और प्रभावी है।
    एक और जो बात मुझे अच्छी लगी कि ग़ज़लों में आप न तो ज़्यादा क्रांति की बात करते हैं, न चालू इश्किया शायरी की। आपकी शायरी पढने से ऐसा लगता है कि आप यह मानते हैं कि शायरी का मतलब कुछ कह देना नहीं होता है, और न सिर्फ़ नारेबाज़ी। आप ख़ामोशी के कायल हैं। आपकी शायरी में खामोशी जो है वह कई अर्थ और रंग लिए हुए है। आपकी इस ग़ज़ल में बसंत/प्रेम है तो सिर्फ़ घटना बनकर नहीं है।

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  13. हवा हूँ हवा मैं
    बसंती हवा हूँ
    सुना बात मेरी
    अनोखी हवा हूँ

    बड़ी बावली हूँ
    बड़ी मस्तमौला
    नहीं कुछ फिकर है
    बड़ी ही निडर हूँ
    ... आपकी इस ग़ज़ल से यह सुन्दर कविता की याद आ गई

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  14. जिसका चला गया कहीं महबूब छोड़कर,
    उसको न रास आयेगी खुशबू बसंत की.

    वाह वाह वाह...इस बासंती रचनाके लिए मेरी दिली दाद कबूल करें...बसंत के कितने ही रंग परोस दिए हैं आपने अपनी रचना के माध्यम से...बेजोड़.

    नीरज

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  15. अच्छा है दोस्तों के तसव्वर में डूबना,
    यादों में सिमट जायेगी खुशबू बसंत की.


    राहे-वफ़ा में प्यार,मुहब्बत की तर्ज़ पर,
    रह रह के गुनगुनायेगी खुशबू बसंत की.
    बहुत सुन्दर वासंती सुगंध बहाया है आप ने

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  16. आद.कुंवर जी,
    रंगीनिये-हयात की खुशबू संभल ज़रा,
    तुझको भी आज़मायेगी खुशबू बसंत की.
    क्या कहने आपकी भावनाओं के !
    पूरी ग़ज़ल वासंती रंग में डूबी हुई है!
    वसंत के स्वागत को हर शेर आतुर !

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  17. रंगीनिये-हयात की खुशबू संभल ज़रा,
    तुझको भी आज़मायेगी खुशबू बसंत की.

    तो आप भी तैयार रहिएगा आजमाने के लिए ....
    कैसे आजमाया ये भी बताइयेगा .....

    गुज़रे हुए बरस से अधिक इस बरस 'कुँवर',
    खुशियाँ लुटा के जायेगी खुशबू बसंत की.

    कोई ख़ास बात है क्या इस बरस .....???
    गजलों से तो लगता है .....
    हा...हा...

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  18. हर बार की तरह लाजबाब।

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  19. बेहद खूबसूरत ग़ज़ल.

    सादर

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  20. सारी की सारी ग़ज़ल बहुत खूबसूरत है..
    हम तो आपकी ग़ज़लों की तारीफ़ करने के काबिल भी ख़ुद को नहीं पाते हैं ...
    आभार..!

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  21. गुज़रे हुए बरस से अधिक इस बरस 'कुँवर',
    खुशियाँ लुटा के जायेगी खुशबू बसंत की.

    शुभकामनाएँ, और थोडी इधर भी………

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  22. बसंत के सुहाने मौसम और उसकी खुशबू लिए आहूत ही बसंती रचना...
    बहुत खूबसूरत ग़ज़ल है...

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  23. अच्छा है दोस्तों के तसव्वर में डूबना,
    यादों में सिमट जायेगी खुशबू बसंत की.
    ....................liked very much...

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  24. .

    बसंत की इस खूबसूरत रचना की खुशबू मुझ तक भी पहुँच गयी। आपकी इस खूबसूरत ग़ज़ल ने मुझे मेरे विवाह की याद दिला दी। ग्यारह फरवरी तो हमेशा आती है , लेकिन विवाह वाले दिन वसंत-पंचमी थी।

    वसंत शब्द ही ऐसा है , जिसके स्मरण मात्र से मन-उपवन सभी हर्षित हो जाते हैं। हर तरफ , बेला ,गुलाब और गेंदे ही नज़र आते हैं और मन-मस्तिष्क उसकी खुशबू से प्रसन्न हो उठता है।

    .

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  25. क्या बात है कुंवरजी.. बहुत ही खूबसूरत कविता बसंत के आगमन के लिए..

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  26. बहुत प्यारी रचना है।

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  27. राहे-वफ़ा में प्यार,मुहब्बत की तर्ज़ पर,
    रह रह के गुनगुनायेगी खुशबू बसंत की.

    गुज़रे हुए बरस से अधिक इस बरस 'कुँवर',
    खुशियाँ लुटा के जायेगी खुशबू बसंत की.


    वाह! क्या बात है! क्या खूब ग़ज़ल लिखी है!
    ग़ज़ल का हर एक शेर बेहद पसंद आया. मनोज की बात से सहमत हूँ. एक बेहतरीन ग़ज़ल के लिए आपका आभार .

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  28. आदरणीय कुंवर जी
    नमस्कार !
    क्या बात है , हर एक जुमला बहुत ख़ूबसूरत !
    खूबसूरत कविता बसंत के आगमन के लिए

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  29. बसंत के हर रंग बिखरे पड़े हैं,इस रचना में...बहुत खूब

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  30. बसंत की खुशबू से सजी खूबसूरत गजल,
    आभार

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  31. जिसका चला गया कहीं महबूब छोड़कर,
    उसको न रास आयेगी खुशबू बसंत की.
    किस किस शेर की तारीफ करू हर शेर लाजबाब है। सुभान अल्लाह।

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  32. आज़ादी और बसंत पर कवितायेँ अच्छी लगीं .आज़ादी वाली में हकीकत उजागर कर दी है.

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  33. कुवर साहेब ,सबने इतनी तारीफ की हे की मेरे पास शब्द ही खत्म हो गए --बसंत तो वेसे भी मदहोश कर जाती हे सूखे पत्ते फिर से जवान हो उठते हे फुल महक जाते हे --बसंत की क्या बात करू --
    " पीली -पीली उगी हे सरसों
    पीली उड़े पतंग
    पीली हे चुनरियाँ गोरी की
    बसंत के आगमन में मस्त !

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  34. बहुत खूबसूरत गज़ल से किया बसंत का आगाज़ ...सुन्दर प्रस्तुति

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  35. "रंगीनिये-हयात की खुशबू संभल ज़रा,
    तुझको भी आज़मायेगी खुशबू बसंत की"

    बसंत-ऋतू की भीनी - भीनी खुशबू से लबरेज़
    मन को लुभाते हुए मधुर शेर पढ़ कर
    ख़ुशी की लहर दौड़ उठी है मन में ... वाह !!

    बाहों में भर के, आज गले से लगा ही लूँ
    माना, नज़र न आएगी खुशबू बसंत की

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  36. वाह...वाह...वाह...

    हर शेर लाजवाब...

    बेहतरीन ग़ज़ल...वाह.

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  37. वाह ...हर पंक्ति अपने आप में बेमिसाल ..खुश्‍बू बसंत की फैल चुकी है वास्‍तव हर ओर ।

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  38. रंगीनिये-हयात की खुशबू संभल ज़रा,
    तुझको भी आज़मायेगी खुशबू बसंत की.
    ....
    वसंत की ताज़गी से परिपूर्ण बहुत सुन्दर गज़ल..बेहतरीन

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  39. रंगीनिये-हयात की खुशबू संभल ज़रा,
    तुझको भी आज़मायेगी खुशबू बसंत की.
    क्या बात है.....

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  40. नमस्कार........आपकी रचना वाकई तारीफ के काबिल है
    मैं ब्लॉग जगत में नया हूँ, कृपया मेरा मार्गदर्शन करें......

    http://harish-joshi.blogspot.com/

    आभार.

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  41. आप की शानदार ग़ज़ल ने बसंत की खुशबू ब्लॉग की दुनिया में बिखेर दी है .
    बहुत ही बेहतरीन शेर....
    "रंगीनिये-हयात की खुशबू संभल ज़रा,
    तुझको भी आज़मायेगी खुशबू बसंत की"

    सलाम .
    शुभाशीष के लिए शुक्रिया. :)

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  42. गुज़रे हुए बरस से अधिक इस बरस 'कुँवर',
    खुशियाँ लुटा के जायेगी खुशबू बसंत की.
    अत्यंत प्रेरणादायीऔर उम्मीद से लबरेज गजल के लिए धन्यवाद.

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  43. बसंत की महक से सुरभित एक बेमिसाल ग़ज़ल।
    सभी शेर प्रशंसा के लायक।
    मुझे इस शेर में पूरी ग़ज़ल का सार नज़र आया-

    गुज़रे हुए बरस से अधिक इस बरस ‘कुँवर‘,
    खुशियाँ लुटा के जायेगी खुशबू बसंत की।

    बसंत के साथ-साथ आपका भी स्वागत कुसुमेश जी।

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  44. बसंती बयार से आपके शब्द फिजां में घुल रहे हैं.



    "राहे-वफ़ा में प्यार,मुहब्बत की तर्ज़ पर,

    रह रह के गुनगुनायेगी खुशबू बसंत की."



    "देती है कुछ संदेस हमें ये पुकार के..
    लग जा गले पुकारती खुशबू बसंत की..!!"

    खूबसूरत... इस से ज्यादा क्या कहूं !!!!!!!

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  45. जिसका चला गया कहीं महबूब छोड़कर,
    उसको न रास आयेगी खुशबू बसंत की ...

    बहुत खूब ... बसंत के ऐसे मीठे तराने सुन कर वो भी वापस आ जाएँगी ...
    लाजवाब ग़ज़ल है सर ... क्या शेर निकाले हैं सुभान . ...

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  46. जिसका चला गया कहीं महबूब छोड़कर,
    उसको न रास आयेगी खुशबू बसंत की.
    वाह साहब... सभी एक से बढकर एक... दिलखुश...

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  47. प्रत्येक शेर बसंत की खूशबू से सरोवार । बेहतरीन ग़ज़ल|

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  48. मेरी नई पोस्ट "बापू को श्रद्‌धाञ्ञलि"पर आपका स्वागत है!

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  49. चारो तरफ़ से आयेगी खुशबू बसंत की,
    बादे-सबा भी लायेगी खुशबू बसंत की.

    रंगीनिये-हयात की खुशबू संभल ज़रा,
    तुझको भी आज़मायेगी खुशबू बसंत की.
    बहुत खुबसूरत ग़ज़ल !

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  50. kya baat hai ...is khushbu se to man sarabor ho gaya...bahut khushbhudar ghazal kahi aapne... saare sher mahak rahe hain..... lagta hai...brahman kaha sach ho gaya hai ... is saal ashiko ko basant men bahut kuch milega...

    dekhiye pate hain usshaaq buton se kya faiz
    ik barahman ne kaha hai ke ye saal accha hai

    -Ghalib

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  51. जिसका चला गया कहीं महबूब छोड़कर,
    उसको न रास आयेगी खुशबू बसंत की.

    very touching ..

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  52. आपकी यह ग़ज़ल बसंत की खुशबू से सराबोर है और एक ताजगी का एहसास कराती है ....

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  53. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 01- 02- 2011
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

    http://charchamanch.uchcharan.com/

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  54. गुज़रे हुए बरस से अधिक इस बरस 'कुँवर',
    खुशियाँ लुटा के जायेगी खुशबू बसंत की.
    ----------
    अरे वाह!
    बसन्त पर तो आपने बहुत ही नायाब गजल रची है!

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  55. जिसका चला गया कहीं महबूब छोड़कर,
    उसको न रास आयेगी खुशबू बसंत की.

    ..वाह !.वसंत के स्वागत में बेहतरीन गज़ल. हरेक शेर खुशबू से भरपूर..

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  56. बहुत ही खूबसूरत बसंत की खूशबू bikherati गजल
    आभार....

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  57. बेहद खूबसूरत ग़ज़ल

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  58. मेरी नई पोस्ट पर आपका स्वागत है !

    भाग कर शादी करनी हो तो सबसे अच्छा महूरत फरबरी माह मे

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  59. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति ..बेहतरीन गजल ....शुभकामनायें

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  60. अच्छा है दोस्तों के तसव्वर में डूबना,
    यादों में सिमट जायेगी खुशबू बसंत की.
    बहुत लाजवाब ग़ज़ल है हर शेर दाद के काबिल. राहे-वफ़ा में प्यार,मुहब्बत की तर्ज़ पर,
    रह रह के गुनगुनायेगी खुशबू बसंत की.


    गुज़रे हुए बरस से अधिक इस बरस 'कुँवर',
    खुशियाँ लुटा के जायेगी खुशबू बसंत की.

    इस बार तो लगता है ये दोनों बातें सच हो ही जनि चाहिए

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  61. अच्छा है दोस्तों के तसव्वर में डूबना,
    यादों में सिमट जायेगी खुशबू बसंत की.

    राहे-वफ़ा में प्यार,मुहब्बत की तर्ज़ पर,
    रह रह के गुनगुनायेगी खुशबू बसंत की.
    bahut hi sundar rachna .

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  62. रसभीने मौसम की याद दिलाई आपने. आभार . अच्छी रचना के लिए बधाई.

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  63. आपकी लेखनी लाजवाब है, कुसुमेश जी !
    जो भलों भलों को आपका दीवाना बना रही है…
    पता नहीं बुरों का क्या होगा ? :)

    अच्छा है दोस्तों के तसव्वर में डूबना,
    यादों में सिमट जाएगी ख़ुशबू बसंत की

    सच है,
    आज के युग में कोई दोस्ती फोकट में तो नहीं निभाता …

    कमाल है जी कमाल है ! सीधे दिल पर असर करता है ये शेर।

    पूरी ग़ज़ल का जवाब नहीं लाजवाब ।


    गुज़रे हुए बरस से अधिक इस बरस 'कुंवर',
    ख़ुशियां लुटा के जाएगी खुशबू बसंत की

    तथास्तु !

    मंगलकामनाएं !

    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  64. कुवर सर
    बहुत देर से ब्लॉग पर आ पाया.. नेट सहजता से उपबल्ध नहीं मुझे.. बाकी आपकी ग़ज़ल वसंत पर पढ़ी तमाम रचनाओं से अच्छी लगी... एक कविता थी कवि केदारनाथ सिंह की.. वासंती हवा.. उसकी याद आ गई... बाकी ऐसे सामायिक ग़ज़ल कहाँ लिखी जा रही है....
    सादर
    पलाश

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  65. राहे-वफ़ा में प्यार,मुहब्बत की तर्ज़ पर,
    रह रह के गुनगुनायेगी खुशबू बसंत की.
    kya baat kahi hai, bahut khoob

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  66. आज दूसरी बार पढने को मिली यह गजल, और फिर तारीफ किए बिना न रह सका। सचमुच लाजवाब लिखते हैं आप।

    ---------
    ध्‍यान का विज्ञान।
    मधुबाला के सौन्‍दर्य को निरखने का अवसर।

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  67. गज़ब की प्रस्तुति है गज़ल का हर शेर बसंत सा ही महक रहा है………बहुत ही शानदार गज़ल हर शेर दिन मे उतर गया।

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  68. अच्छा है दोस्तों के तसव्वर में डूबना

    यादों में सिमट जाएगी खुशबू बसंत की

    कुसुमेश जी ,

    पूरी की पूरी ग़ज़ल बहुत प्यारी लगी

    हर शेर जानदार !

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  69. जिसका चला गया कहीं महबूब छोड़कर,
    उसको न रास आयेगी खुशबू बसंत की..............

    राहे-वफ़ा में प्यार,मुहब्बत की तर्ज़ पर,
    रह रह के गुनगुनायेगी खुशबू बसंत की

    पूरी ग़ज़ल लाजवाब ।

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  70. खुशबू बसंत की......
    उम्दा ग़ज़ल...
    लाजवाब शेर....

    बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.

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  71. kushmesh sahab bahut hi sunder gazal...... har pankti behatarin. sunder prastuti.

    ReplyDelete
  72. सुंगधित वसंती बयार से मन प्राण को सराबोर करती खूबसूरत अभिव्यक्ति. आभार.
    सादर,
    डोरोथी.

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  73. जिसका चला गया कहीं महबूब छोड़कर,
    उसको न रास आयेगी खुशबू बसंत की.

    अच्छा है दोस्तों के तसव्वर में डूबना,
    यादों में सिमट जायेगी खुशबू बसंत की.

    बसंत के साथ-साथ आपका भी स्वागत कुसुमेश जी।


    ॐ कश्यप में ब्लॉग जगत में नया हूँ
    कृपया आप मेरा मार्ग दर्शन करे
    धन्यवाद
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  74. अब सभी ब्लागों का लेखा जोखा BLOG WORLD.COM पर आरम्भ हो
    चुका है । यदि आपका ब्लाग अभी तक नही जुङा । तो कृपया ब्लाग एड्रेस
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  75. बहुत सुंदर
    वसन्त की हार्दिक शुभकामनायें !

    http://unluckyblackstar.blogspot.com/

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  76. Adarniye Kusmesh jee,
    Ghazal vakai achhi ban padi hai.Mere blog par padharne aur utsahvardhan ke liye aabhar.

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  77. वसन्त की आप को हार्दिक शुभकामनायें !

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  78. आपको वसंत पंचमी की ढेरों शुभकामनाएं!
    सादर,
    डोरोथी.

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  79. जिसका चला गया कहीं महबूब छोड़कर,
    उसको न रास आयेगी खुशबू बसंत की.

    अच्छा है दोस्तों के तसव्वर में डूबना,
    यादों में सिमट जायेगी खुशबू बसंत की.

    आपको वसंत पंचमी की ढेरों शुभकामनाएं!

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  80. बस लाजवाब....

    इतने सारे लोगों ने इतना कुछ कह रखा है कि नया क्या कहूँ....

    आपकी लेखनी ऐसे ही सुन्दर कृतियाँ रचती रहे...शुभकामनाएं..

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