Saturday, December 11, 2010

आज मीठा हुआ ज़हर देखो

    कुँवर कुसुमेश     


सुर्ख़ियों में है ये ख़बर देखो,
आह भरता हुआ शहर देखो.

घर में सांकल चढ़ा के बैठी है,
ज़िंदगी के दिलों में डर देखो.

वक़्त की कैंचियाँ परिंदों के,
काटने पर तुली हैं पर देखो.

आज उनकी ज़ुबान शीरी है,
आज मीठा हुआ ज़हर देखो.

इक बड़ी बात ले के निकली है,
एक छोटी-सी ये बहर देखो.

इस सदी का यही तो हासिल है,
क़िस्मतों का लिखा 'कुँवर'देखो.

50 comments:

  1. क्या खूब भाव अभिव्यक्त हुआ है, कुसुमेश जी।

    आज उनकी ज़ुबान शीरी है,
    आज मीठा हुआ ज़हर देखो.

    ReplyDelete
  2. घर में सांकल चढ़ा के बैठी है,
    ज़िंदगी के दिलों में डर देखो
    बहुत खुब।

    ReplyDelete
  3. क्या बयां किया है! जब दिल से लिखा जाता है तो उसकी खुसबू पढ़ने वाले के पास पहुँच ही जाती है.

    सुन्दर रचना के लिए साधुवाद

    ReplyDelete
  4. घर में सांकल चढ़ा के बैठी है,
    ज़िंदगी के दिलों में डर देखो

    इक बड़ी बात ले के निकली है,
    एक छोटी-सी ये बहर देखो

    बड़ी बातें समेटे हुए हैं सारे ही शेर..
    आपके ख़यालों की दुनिया बहुत बड़ी है...आपका आभार !

    ReplyDelete
  5. घर में सांकल चढ़ा के बैठी है,
    ज़िंदगी के दिलों में डर देखो।

    वक़्त की कैंचियाँ परिंदों के,
    काटने पर तुली हैं पर देखो।

    वाह...बहुत खूब, कुसुमेश जी..
    जीवन के कुछ यथार्थ पलों को आपने इन पंक्तियों में सुंदरता से पिरोया है।

    ReplyDelete
  6. आज मीठा हुआ ज़हर देखो.
    काफी मारक है आपकी पूरी रचना,
    और इस पंक्ती की पहुँच तो बहुत पहुंची हुयी लग रही है

    ReplyDelete
  7. आदरणीय कुंवर कुसुमेश जी
    नमस्कार !
    बहुत ही ख़ूबसूरत ग़ज़ल है, हमेशा की तरह बेहतरीन !

    आज उनकी ज़ुबान शीरी है,
    आज मीठा हुआ ज़हर देखो.

    क्या निशाना है सटीक !

    इक बड़ी बात ले के निकली है,
    एक छोटी-सी ये बहर देखो


    वाकई ! कम अल्फ़ाज़ में बहुत बड़ी बात , बेहतरीन शिल्प सौष्ठव के साथ …
    बधाई !
    मुबारकबाद !

    शुभकामनाओं सहित
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

    ReplyDelete
  8. घर में सांकल चढ़ा के बैठी है,
    ज़िंदगी के दिलों में डर देखो.

    आज उनकी ज़ुबान शीरी है,
    आज मीठा हुआ ज़हर देखो.

    क्या ख़ूब लिखा है? बहुत बढ़िया।

    सारे शेर एक से बढ़कर एक!

    ReplyDelete
  9. बहुत खूब...
    तारीफ करने को शब्द नहीं मिल रहे... एक-एक पंक्ती बहुत अच्छी है...

    ReplyDelete
  10. छोटी बहर की बेहतरीन ग़ज़ल.. हर शेर अपने आप में एक वजूद लिए हुए. . एक परिदृश्य लिए हुए... खास तौर पर यह शेर तो आज के पूरे समाज की दशा बता रहा है...
    घर में सांकल चढ़ा के बैठी है,
    ज़िंदगी के दिलों में डर देखो.

    ReplyDelete
  11. इक बड़ी बात लेके निकली है,
    एक छोटी-सी ये बहर देखो

    आज उनकी जुबान शीरी है,
    आज मीठा हुआ जहर देखो

    एक से बढ़कर एक शेर है, छोटी बहर की लाजबाव गजल कही है आपने। बहुत बहुत आभार जी!

    -: VISIT MY BLOG :-
    आपका मेरे ब्लोग पर स्वागत है।

    "कंप्यूटर से आँखो की सुरक्षा कैसे करेँ............लेख"

    ReplyDelete
  12. आज उनकी ज़ुबान शीरी है,
    आज मीठा हुआ ज़हर देखो.

    इक बड़ी बात ले के निकली है,
    एक छोटी-सी ये बहर देखो.


    वाह वाह वाह| कुँवर जी कमाल कर दिया| बहुत बहुत बधाई|

    ReplyDelete
  13. वक़्त की कैंचियाँ परिंदों के,
    काटने पर तुली हैं पर देखो.
    और
    इस सदी का यही तो हासिल है,
    क़िस्मतों का लिखा 'कुँवर'देखो.
    कमाल की अभिव्यक्ति है। बार-बार पढते जा रहा हूं, और हर बार मुंह से निकलता है ...इरशाद!
    बेहतरीन ग़ज़ल।

    ReplyDelete
  14. किस्‍मत के लिखे पर भारी पड़े आपकी लेखी.

    ReplyDelete
  15. वक़्त की कैंचियाँ परिंदों के,
    काटने पर तुली हैं पर देखो.
    बहुत खूब ......बेहतरीन रचना .....

    ReplyDelete
  16. हर एक शेर में है जिन्दगी के कई सबब .बहुत खूब लिख आपने ।

    ReplyDelete
  17. सुर्ख़ियों में है ये ख़बर देखो,
    आह भरता हुआ शहर देखो.

    घर में सांकल चढ़ा के बैठी है,
    ज़िंदगी के दिलों में डर देखो.

    jidhar dekho yahi aalam hai

    ReplyDelete
  18. मुख में राम , बगल में छुरी का ही ज़माना है । बेहतरीन ग़ज़ल की बधाई।

    ReplyDelete
  19. आज उनकी ज़ुबान शीरी है,
    आज मीठा हुआ ज़हर देखो.
    ... bahut khoob ... behatreen gajal !!!

    ReplyDelete
  20. घर में सांकल चढ़ा के बैठी है,
    ज़िंदगी के दिलों में डर देखो.

    वक़्त की कैंचियाँ परिंदों के,
    काटने पर तुली हैं पर देखो.

    बहुत सुन्दर गज़ल ..आईना दिखती हुई

    ReplyDelete
  21. इक बड़ी बात ले के निकली है,
    एक छोटी-सी ये बहर देखो.
    chotee bahar badee baat.laajawaab.

    ReplyDelete
  22. हर एक शेर लाजवाब लगा ।

    ReplyDelete
  23. "वक़्त की कैंचियाँ परिंदों के,
    काटने पर तुली हैं पर देखो.
    आज उनकी ज़ुबान शीरी है,
    आज मीठा हुआ ज़हर देखो."
    आदरणीय कुशमेस सर,सादर प्रणाम.
    पूर्व के गजलों की भांति आपकी ये
    गजल भी वास्तविकता के धरातल से
    उठकर आई है.जीवन के बदलते रूप
    पर सटीक प्रहार करती है.सुंदर अभिव्यक्ति,
    सुंदर शिल्प.

    ReplyDelete
  24. आपकी सारी रचनाये बहुत नयाब है जो दिल से लिखते है वह इस तरह उम्दा ही लिखते है । मेरा ब्लाग विजट करने का आभार ।
    Ganga Ke Kareeb
    http://sunitakhatri.blogspot.com

    ReplyDelete
  25. सुन्दर एवं सार्थक अभिव्यक्ति . पढ़ के प्रफुल्लित हुआ मन .

    ReplyDelete
  26. आज उनकी ज़ुबान शीरी है,
    आज मीठा हुआ ज़हर देखो.

    वाह! सच में, बेहद कमाल की रचना है कुसुमेश जी....बहुत खूब्!

    ReplyDelete
  27. इस सदी का यही तो हासिल है,
    क़िस्मतों का लिखा 'कुँवर'देखो.
    --
    बहुत बढ़िया रही यह गजल!
    गुनगुनाते हुए अच्छा लग रहा है!

    ReplyDelete
  28. बहुत ही खुबसूरत रचना...मेरा ब्लागः"काव्य कल्पना" at http://satyamshivam95.blogspot.com/ मेरी कविताएँ "हिन्दी साहित्य मंच" पर भी हर सोमवार, शुक्रवार प्रकाशित.....आप आये और मेरा मार्गदर्शन करे......धन्यवाद

    ReplyDelete
  29. कुसुमेश जी , बहुत सुन्दर रचना!

    ReplyDelete
  30. कुसुमेश जी,
    आज सुबह सुबह आपकी इतनी अच्छी ग़ज़ल पढकर मन को जो ख़ुशी मिली उसे शब्दों में व्यक्त कर पाना मुश्किल है !
    पूरी ग़ज़ल मानवीय संवेदना को मुखरित कर रही है !
    यह शेर तो कमाल का है ,
    वक़्त की कैंचियाँ परिंदों के,
    काटने पर तुली हैं पर देखो.
    -ज्ञानचंद मर्मज्ञ

    ReplyDelete
  31. बहुत सुन्दर रचना है

    घर में सांकल चढ़ा के बैठी है,
    ज़िंदगी के दिलों में डर देखो.


    वक़्त की कैंचियाँ परिंदों के,
    काटने पर तुली हैं पर देखो.

    बहुत - बहुत बधाई

    ReplyDelete
  32. आज उनकी ज़ुबान शीरी है,
    आज मीठा हुआ ज़हर देखो.


    वाह एक और लाजवाब ग़ज़ल ... और कमाल के शेर .. समाज का आईना ...

    ReplyDelete
  33. आदरणीय कुँवर जी
    नमस्कार !
    ...........कमाल कर दिया|बेहतरीन ग़ज़ल .......दिल से मुबारकबाद|
    ..........बहुत देर से पहुँच पाया ....माफी चाहता हूँ..

    ReplyDelete
  34. भावों को मोतियों की तरह सुन्दर शब्दों में पिरोया है... बहुत खूब

    ReplyDelete
  35. बहुत सुन्दर और लाजवाब ग़ज़ल ! आपकी लेखनी की जितनी भी तारीफ़ की जाए कम है! उम्दा प्रस्तुती! बधाई!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

    ReplyDelete
  36. बेहतरीन लाजवाब बेहद खूबसूरत ग़ज़ल. पढ़कर दिल खुश हो गया.

    ReplyDelete
  37. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी रचना कल मंगलवार 14 -12 -2010
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..


    http://charchamanch.uchcharan.com/

    ReplyDelete
  38. bahut hi sunder gajal hai aapki
    bahut khub

    samaye milne par kabhi yaha bhi aaye
    www.deepti09sharma.blogspot.com

    der se aane ko mafi chahti hu

    ReplyDelete
  39. एक एक पंक्ति बेहद प्रभावशाली!

    ReplyDelete
  40. बहुत ही सुन्‍दर शब्‍दों का संगम ...।

    ReplyDelete
  41. mai b.tech 3 year m hu
    and mere exam 6 jan tak hai
    aapka blog par aane ko bahut dhanyvad
    yuhi aashih banaye rakhe
    deepti sharma
    meri gmail id hai
    deepti09sharma@gmail.com

    ReplyDelete
  42. बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति.........मेरा ब्लाग"काव्य कल्पना" at http://satyamshivam95.blogspot.com/ जिस पर हर गुरुवार को रचना प्रकाशित साथ ही मेरी कविता हर सोमवार और शुक्रवार "हिन्दी साहित्य मंच" at www.hindisahityamanch.com पर प्रकाशित..........आप आये और मेरा मार्गदर्शन करे..धन्यवाद

    ReplyDelete
  43. कुंवर जी, आपके कद के अनुरूप ही एक शानदार गजल।

    ---------
    दिल्‍ली के दिलवाले ब्‍लॉगर।

    ReplyDelete
  44. आज उनकी ज़ुबान शीरी है,
    आज मीठा हुआ ज़हर देखो.


    हरेक शेर लाज़वाब...बहुत ही शानदार गज़ल..

    ReplyDelete
  45. पांच लाख से भी जियादा लोग फायदा उठा चुके हैं
    प्यारे मालिक के ये दो नाम हैं जो कोई भी इनको सच्चे दिल से 100 बार पढेगा।
    मालिक उसको हर परेशानी से छुटकारा देगा और अपना सच्चा रास्ता
    दिखा कर रहेगा। वो दो नाम यह हैं।
    या हादी
    (ऐ सच्चा रास्ता दिखाने वाले)

    या रहीम
    (ऐ हर परेशानी में दया करने वाले)

    आइये हमारे ब्लॉग पर और पढ़िए एक छोटी सी पुस्तक
    {आप की अमानत आपकी सेवा में}
    इस पुस्तक को पढ़ कर
    पांच लाख से भी जियादा लोग
    फायदा उठा चुके हैं ब्लॉग का पता है aapkiamanat.blogspotcom

    ReplyDelete
  46. पांच लाख से भी जियादा लोग फायदा उठा चुके हैं
    प्यारे मालिक के ये दो नाम हैं जो कोई भी इनको सच्चे दिल से 100 बार पढेगा।
    मालिक उसको हर परेशानी से छुटकारा देगा और अपना सच्चा रास्ता
    दिखा कर रहेगा। वो दो नाम यह हैं।
    या हादी
    (ऐ सच्चा रास्ता दिखाने वाले)

    या रहीम
    (ऐ हर परेशानी में दया करने वाले)

    आइये हमारे ब्लॉग पर और पढ़िए एक छोटी सी पुस्तक
    {आप की अमानत आपकी सेवा में}
    इस पुस्तक को पढ़ कर
    पांच लाख से भी जियादा लोग
    फायदा उठा चुके हैं ब्लॉग का पता है aapkiamanat.blogspotcom

    ReplyDelete