Tuesday, December 21, 2010

 पीपल पर तीन कुण्डलियाँ 

कुँवर कुसुमेश 

   -१-  
पीपल,पाकड़,नीम,वट,जामुन ,गूलर,आम.
आते हैं ये पेड़ सब,औषधियों के काम.
औषधियों के काम पूर्णतः ये उपयोगी,
इनके सेवन से निरोग होते हैं रोगी.
आजीवन निस्स्वार्थ नियंत्रित करते जल-थल.
पेड़ों में अति प्रमुख कहा जाता है पीपल.
 *****
  -२-
पीपल की उत्पत्ति से, जुड़ी बात ये खास.
कहते हैं इस वृक्ष पर, करते देव निवास.
करते देव निवास अतः ये पूजे जाते.
प्राणवायु दे अधिक प्रदूषण दूर भागते.
पक्षी को आवास,छाँव पथिकों को शीतल-
देते हैं अविराम, अतः पूजित हैं पीपल.
  *****
   -३-  
वायु प्रदूषण को दिया,जिसने तुरत खदेड़.
लुप्त हो रहे आजकल,वे पीपल के पेड़.
वे पीपल के पेड़ ऑक्सीजन दें ज्यादा.
दूर करेंगे सतत प्रदूषण इनका वादा.
मित्र,करो पीपल के पेड़ों का संरक्षण.
अगर चाहते आप, दूर हो वायु प्रदूषण.
 *****

44 comments:

  1. पीपल के वृक्ष की गुणवत्ता की बहुत अच्छी जानकारी जी आपने...
    सदैव आभारी..

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  2. आदरणीय कुंवर कुसुमेश जी
    हमारे धर्म में पीपल बहुत उपयोगी है! हमें भी धन्य कीया आपने

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  3. बहुत सुंदर भाव! पर्यावरण के प्रति गहरी चिंता और संदेश बहुत अच्छा लगा।

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  4. पीपल पर्यावरण एवं हमारे धामिर्क कारणो से अति महत्वपुर्ण है इनकी रक्षा के लिए जरूरी पोस्ट

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  5. पीपल की महिमा बताती हुई बेहतरीन रचना। नीम और पीपल ही ऐसे दो वृक्ष हैं जो चौबीसों घंटे ऑक्सीजन उत्सर्जित करते हैं। निश्चय ही विलुप्त होते इन वृक्षों के संरक्षण पर ध्यान देना चाहिए।

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  6. पीपल पर तीनों कुण्डलियाँ संदेशयुक्त और सुन्दर हैं। बधाई!

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  7. वाह, कुसुमेश जी, वाह ...
    मन आनंदित हो गया इन सुंदर कुंडलियों को पढ़कर।
    सार्थक संदेश देती हुई ये कुंडलियां वैज्ञानिक तथ्यों का भी वर्णन कर रही हें।
    इसे आप अपनी श्रेष्ठ रचनाओं में से एक समझिए।...शुभकामनाएं।

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  8. पीपल सभी वनस्पतियों में पवित्र माना गया है.. आपकी कुण्डलियाँ पीपल के महत्व को और भी रेखांकित कर रही हैं.. इस तरह की कुंडलियों को बाल साहित्य या पाठ्यक्रम में शामिल करने की आवश्यकता है..

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  9. जानकारी से भरी एक आवश्यक पोस्ट, बहुत बहुत बधाई

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  10. अच्‍छी सधी हैं आपकी ये कुंडलियां.

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  11. पीपल को बचाने के आव्हान के साथ पर्यावरण चेतना के लिए समर्पित आपकी भावनाएं निश्चित रूप से स्वागत योग्य हैं . हिन्दी कविता से विलुप्त हो रही कुंडली विधा के माध्यम से आपका यह प्रस्तुतिकरण बहुत दिलचस्प लगा .आभार .

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  12. कुँवर कुसुमेश जी बधाई पीपल के पेड़ जैसे विषय पर असाधारण काव्य प्रस्तुति के लिए| अरसे बाद ऐसे विषय पर पढ़ा है|

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  13. बहुत सुंदर बाते बताई आप ने पीपल के बारे, आप की पोस्ट मे कविता के अक्षर बहुत ही छोटे छोटे हे, क्रुप्या इन्हे थोडा ओर बडा करे पधने मै सब को असानी तो रहे. धन्यवाद

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  14. पीपल के संरक्षण के लिए प्रेरित करती आपकी ये कुण्डलियाँ काफी प्रभावी एवं मन मोहने वाली हैँ। बहुत बहुत आभार बावू जी।

    आपका भी मेरे ब्लोग पर स्वागत है।

    " ना जाते थे किसी दर पे हम "

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  15. wow,...so beutifuly created......kundali aur peepal dono ko hi vilupt hone se bachaane ka saarthak prayaas.....dhanyavaad

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  16. वाह, कुसुमेश जी,
    जानकारी से भरी तीनो कुंडलियां बहुत ही सुंदर तथा गहरे भावों से परिपूर्ण है..........

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  17. एक को क्या कहूँ, तीनो ही बेहतरीन हैं ..

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  18. अध्यात्म का टच उत्कृष्ट लेखन का नमूना हैं...बहुत अच्छा लगा

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  19. आदरणीय कुसुमेश जी,
    प्रदूषण पर पीपल के पेड़ों की विशेषता दोहों के सुन्दर शिल्प में पाग कर प्रस्तुत करने का आपका अंदाज़ मन को भा गया !
    -ज्ञानचंद मर्मज्ञ

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  20. bahut jaankaari bharee rachnaa hai sir.liked it very much.

    of the people,by the people,for the people.

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  21. पीपल की सारी विशेषताएं आपने इन कुंडलियों में बता दीं... बहुत अच्छी रचनाएँ .

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  22. अच्छी जानकारी देने के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया। मेरे ब्लाग पर नई पोस्ट आपकी नजरे इनायत के लिए बेकरार है।

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  23. कुसमेश सर,प्रणाम.
    "आजीवन निस्स्वार्थ नियंत्रित करते जल-थल.
    पेड़ों में अति प्रमुख कहा जाता है पीपल."
    पीपल की महिमा का गुणगान अति सुंदर है क्योंकि इसमें कही गई बात शिक्षाप्रद है.जहाँ तक शिल्प की बात है,आपकी रचना ने अनायास ही काका हाथरसी की याद दिला दी है.बेहद संगीतमय एवं सारगर्भित प्रस्तुति.

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  24. बहुत सुन्दर कुसुमेश जी,
    आप ने पीपल के गुणों का अच्छा बखान किया है
    बहुत - बहुत धन्यवाद

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  25. पीपल के पेड़ की गुणवत्ता पर बहुत सुन्दर रचना है यह ...
    आप मेरे निम्नोक्त id पर मेल कर सकते हैं:
    indraneel1973@gmail.com

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  26. कुशमेश जी .....बहुत खूब. पीपल की महिमा का सुंदर बखान किया है आपने.
    इंतजार

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  27. पीपल पर सारपूर्ण कुण्डलियाँ..

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  28. पीपल को केन्द्र में रखकर लिखी ये सार्थक रचना बहुत अच्छी है।
    पीपल के बारे में आपकी धारणा को मेरा भी समर्थन है क्योंकि ये धारणा सच है।

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  29. आस्था और श्रद्धा का अनुपम संगम देखने को मिला आपकी इन कुंडलियों में ..सन्देशयुक्त है सभी...शुक्रिया

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  30. हमारी सुसभ्य संस्कृति के प्रतीक
    पीपल और नीम वनस्पति का बहुत सुन्दर
    वर्णन किया है आपने ...
    आदरणीय अरुण रॉय जी की बात से सहमत हूँ... !!

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  31. सार्थक लेखन शायद इसी को तो कहतें होंगें ना !!!
    नहीं तो जो कुछ बुडबकताई सभी और फैली है वही ज्यादा नज़र आती है . ऐसे औचित्यपूर्ण लेख तो कहीं छिपे रहतें है अधिकतर .
    आभार !!

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  32. छंद पुराने आपके, देते हैं गुण-ज्ञान।
    औषधियों के साथ में, अपनाना अनुपान।।
    --
    सभी कुण्डलियाँ बहुत ही उपयोगी हैं!

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  33. आदरणीय कुंवर कुसुमेश जी
    नमस्कार !
    विलंब से आने के लिए क्षमाप्रार्थी हूं …
    बहुत आनन्द आता है आपके यहां आ'कर ।

    आपकी प्रतिष्ठा में एक कुण्डली सादर -

    चले कुंवर की लेखनी , जगत हो रहा दंग !
    दोहे कुण्डली; …साथ ही गीत ग़ज़ल के रंग !!
    गीत ग़ज़ल के रंग , छंद से राजी गुणियन !
    पुनः पुनः पढ़ने को होता सबका ही मन !!
    मगन हुआ राजेन्द्र , दुआएं दिल से निकले !
    चले कुंवर की लेखनी , गज़ब दिन-रात चले !!


    शुभकामनाओं सहित
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  34. पर्यावरण का काव्यमय संदेश, शिक्षाप्रद संप्रेषण है। साधुवाद!!

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  35. wah bhai sahab!
    peepal jaise pavitr pend par teeno kundaliyan bejod hain.

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  36. बहुत सुंदर भाव!पीपल की महिमा का सुंदर बखान किया है आपने.

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  37. बहुत अच्छी..... जानकारी देती एक बेहतरीन रचना

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  38. सुन्दर भावपूर्ण अभिव्यक्ति। पीपल, बरगद हमारे लिये पूज्य होने के साथ-साथ प्राणवायु के बहुत बड़े स्रोत हैं। आज भले ही मनुष्य ने अट्टलिकायें खड़ी कर ली हो, हरीतिमा को नागफनी में बदल दिया हो..........पर ज्येष्ठ माह की दुपहरी में यदि कोई भूल से भी पथ भटक जाये तब उसे वृक्षों का महत्त्व पता चलेगा।
    बहुत ही अच्छे एवं समीचीन विषय पर आपने तथ्यपूर्ण जानकारी प्रस्तुत की है........इसके लिये जो आपने माध्यम चुना है ‘कुण्डलियाँ’ वह भी सराहनीय है................अपने संदेश में ऋजुत्व एक आदर्श कवि की विशेषता होती है।

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