Tuesday, August 14, 2012

हम-तुम पीटें ढोल,चलो फिर आज़ादी के.................



कुँवर कुसुमेश 

आज़ादी के हो गये,पूरे पैसठ साल.

इतने वर्षों बाद भी,जनता है बेहाल.

जनता है बेहाल,कमर तोड़े मँहगाई.

नेताओं ने मगर,करी है खूब कमाई.

नेता ज़िम्मेदार,देश की बरबादी के.

हम-तुम पीटें ढोल,चलो फिर आज़ादी के.
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Tuesday, August 7, 2012

उनको थी राजनीति से हरवक्त एलर्जी.............



मैं तो बड़ा निराश हूँ अन्ना की टीम से.
इस दर्जा पलट जायेंगे सोंचा कभी न था.
उनको थी राजनीति से हरवक्त एलर्जी.
उनकी नज़र में काम ये अच्छा कभी न था.
                                     -कुँवर कुसुमेश 

Friday, July 27, 2012

तुलसी रस का व्याधि में सर्वोत्तम उपयोग




कुँवर कुसुमेश 

ज्वर-जुकाम-कृमि-नासिका,या हो खासी रोग.

तुलसी रस का व्याधि में,सर्वोत्तम उपयोग.

सर्वोत्तम उपयोग,बिना पैसे घर चंगा.

निर्धनता भी डाल न पाए कोई अड़ंगा.

क्यारी या गमले में तुलसी रखें लगाकर.

पास न आने दें जुकाम-हिचकी-खासी-ज्वर.

Wednesday, July 18, 2012

सुपर स्टार राजेश खन्ना को दिली और भाव-भीनी श्रद्धांजलि :-


उम्र भर जिसमें रहा था वो ठिकाना छोड़ के.
चल दिया पंछी यहाँ का आबो-दाना छोड़ के.
क्या नहीं था पास जब तक तुम हमारे साथ थे,
है अभी भी पास सब कुछ मुस्कुराना छोड़ के.
                                        -कुँवर कुसुमेश 


                                             

Wednesday, June 13, 2012

चेहरा-ए-इन्सान के पीछे भी चेहरा............................



कुँवर कुसुमेश 

लोग शक करने लगे हैं बाग़बाँ पर.
वक़्त ऐसा आ पड़ा है गुलसिताँ पर.

चेहरा-ए-इन्सान के पीछे भी चेहरा,
हम करें किस पर यकीं आख़िर यहाँ पर.

कर रहा ख़ामोशियों की वो हिमायत,
है नहीं क़ाबू जिसे अपनी ज़ुबाँ पर.

आज के साइंस दानों का है दावा,
कल बसेगी एक दुनिया आसमाँ पर.

कशमकश ही कशमकश है जानते हैं,
नाज़ है फिर भी हमें हिन्दोस्ताँ पर.

है 'कुँवर' मुश्किल मगर उम्मीद भी है,
कामयाबी पाऊँगा हर इम्तिहाँ पर.
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Monday, June 4, 2012

विश्व पर्यावरण दिवस पर दोहे




कुँवर कुसुमेश 

पर्यावरण बनाइये,आप प्रदूषण मुक्त.
हिल मिल करके कीजिये,सब प्रयास संयुक्त.

कभी कहीं भू-स्खलन,कभी कहीं भूचाल.
दूषित पर्यावरण से ,जन-जीवन बेहाल.

सुखमय वातावरण हो,हो आमोद-प्रमोद.
हरी-भरी दिखती रहे,सदा प्रकृति की गोद.

दूषित पर्यावरण है,आप मनायें खैर.
जमा चुका है पैर यूँ,ज्यूँ अंगद के पैर.

सारी दैवी आपदा,के तुम जिम्मेदार.
पहले मनमानी किया,लेकिन अब लाचार.

वन संरक्षण हेतु लो,सामूहिक संकल्प.
तब शायद कुछ हो सके,समय बचा है अल्प.
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Thursday, May 17, 2012

वैध समलैंगिकता हुई.........................



कुँवर कुसुमेश 

आत्मा से कभी पूछ ले.
कौन-सी राह पर तू चले.

वैध समलैंगिकता हुई,
उफ़ अदालत के ये फैसले.

पश्चिमी तर्ज़ पर देश में,
हल हुए हैं सभी मसअले

ठोकरें-ठोकरें हर क़दम,
ज़िंदगी के यही मर्हले.

आग  ने भी जलाया 'कुँवर'
और पानी से भी हम जले.
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मर्हले=पड़ाव/ठहरने का स्थान