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Saturday, December 31, 2011

नया साल 2012 मुबारक

 
कुँवर कुसुमेश 

मालिक तू इत्मिनान से दैरो-हरम में है.
पर चाहने वाला तेरा दरिया-ए-ग़म में है.

सहमा हुआ है आदमी आतंकवाद से,
बम से ज़ियादा खौफ़ छुपा हर्फ़े-बम में है.

चौड़ी हुई सड़क तो कई पेड़ कट गये,
पर्यावरण का नाश छुपा इस उधम में है.

रॉकेट गया है चाँद पे पानी तलाशने,
साइंस दाँ बताए कोई किस भरम में है.

अगले जनम की सोंच के सिहरन-सी हो गई,
कुछ इस तरह का दर्द मिला इस जनम में है.

उम्मीद करें आप नये साल से 'कुँवर',
इसका ही नाम दोस्तों अहले-करम में है.

शब्दार्थ:-
दैरो-हरम=मंदिर-मस्जिद, दरिया-ए-ग़म=ग़म का दरिया,
हर्फ़े-बम=बम शब्द, अहले-करम=दया करने वाला 

Friday, December 31, 2010

आदमी फिर नये सफ़र पर है
कुँवर कुसुमेश

लो नया आफ़ताब सर पर है,
आदमी फिर नये सफ़र पर है.

तुमको कितने क़रीब से देखे,
ये नये साल की  नज़र पर है.

लोग निकले  बधाइयाँ देने ,
बात ठहरी अगर-मगर पर है.

कितनी ऊंची उड़ान ले लेगा ,
ये परिंदों के बालोपर पर है.

लोग पत्थर लिए नज़र आये,
कोई फल-फूल क्या शजर पर है?

सोच इन्सान की बदल देना,
एक फ़नकार के हुनर पर है.

भूल जाये भले ही ये दुनिया,
पर भरोसा हमें 'कुँवर' पर है.
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बालोपर-सामर्थ्य, शजर-पेड़