Tuesday, January 4, 2011

दोहे "योग" पर
       
कुँवर कुसुमेश 

रक्तचाप,पथरी,दमा,ह्रदयरोग,मधुमेह.
दूर रहेंगे आपसे , अगर योग से नेह.
                   
बिन औषधि बिन डॉक्टर ,मानव हुआ निरोग.
जिससे ये संभव हुआ,कहते उसको योग.

बरसों के बीमार को,दो दिन में आराम.
चाहे करके देखिये,प्रातः प्राणायाम.

यदि लगती है आपकी,तबियत थोड़ी सुस्त.
योगासन अपनाइए,बनिए चुस्त-दुरुस्त.

दवा करोड़ों व्याधि की,सिर्फ एक है 'योग'.
फिर से महिमा योग की ,जान गए अब लोग.

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Friday, December 31, 2010

आदमी फिर नये सफ़र पर है
कुँवर कुसुमेश

लो नया आफ़ताब सर पर है,
आदमी फिर नये सफ़र पर है.

तुमको कितने क़रीब से देखे,
ये नये साल की  नज़र पर है.

लोग निकले  बधाइयाँ देने ,
बात ठहरी अगर-मगर पर है.

कितनी ऊंची उड़ान ले लेगा ,
ये परिंदों के बालोपर पर है.

लोग पत्थर लिए नज़र आये,
कोई फल-फूल क्या शजर पर है?

सोच इन्सान की बदल देना,
एक फ़नकार के हुनर पर है.

भूल जाये भले ही ये दुनिया,
पर भरोसा हमें 'कुँवर' पर है.
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बालोपर-सामर्थ्य, शजर-पेड़ 

आदमी फिर नये सफ़र पर है


कुँवर कुसुमेश

लो नया आफ़ताब सर पर है,

आदमी फिर नये सफ़र पर है.

तुमको कितने क़रीब से देखे,
ये नये साल की  नज़र पर है.

लोग निकले  बधाइयाँ देने ,
बात ठहरी अगर-मगर पर है.

कितनी ऊंची उड़ान ले लेगा ,
ये परिंदों के बालोपर पर है.

लोग पत्थर लिए नज़र आये,
कोई फल-फूल क्या शजर पर है?

सोच इन्सान की बदल देना,
एक फ़नकार के हुनर पर है.

भूल जाये भले ही ये दुनिया,
पर भरोसा हमें 'कुँवर' पर है.

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बालोपर-सामर्थ्य, शजर-पेड़ 

Tuesday, December 28, 2010

तुमसे मिल जायेगी कुछ इम्दाद पहली जनवरी

कुँवर कुसुमेश 

आ गई फिर घूम फिर कर याद पहली जनवरी,
तीन सौ पैंसठ दिनों के बाद पहली जनवरी.

ग़ैर हो,अपना हो,दुश्मन हो या कोई दोस्त हो,
इस बरस कोई न हो नाशाद पहली जनवरी.

अब किसी सूरत परिंदों के कतर पायें न पर,
लोग कह देंगे तुझे सैय्याद पहली जनवरी.

तुम सुनोगे गर नहीं तो कौन सुनने आयेगा,
अब कोई सुनता नहीं फ़रियाद पहली जनवरी.

हम भी इस उम्मीद में आँखें बिछाये हैं 'कुँवर',
तुमसे मिल जायेगी कुछ इम्दाद पहली जनवरी.

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 नाशाद-दुखी, इम्दाद - मदद  

Friday, December 24, 2010

Merry Christmas

कहाँ हो ईसा-ओ-मरियम तलाश करता हूँ

 कुँवर कुसुमेश 

ख़िजाँ  में खुशनुमां मौसम तलाश करता हूँ,
पनपते ज़ख्म का मरहम तलाश करता हूँ.

बदलता वक़्त तुम्हें दे रहा है आवाज़ें,
कहाँ हो ईसा-ओ-मरियम तलाश करता हूँ.

किसी ग़रीब के आँसू ही पोछ लें दामन,
नज़र में क़तरा-ए-शबनम तलाश कारता हूँ.

ज़माने भर को जो दे अम्नो-प्यार का पैग़ाम, 
गगन में फिर वही परचम तलाश करता हूँ.

ग़ज़ल ग़ज़ल में 'कुँवर' एकता की बात लिए,
तमाम धर्म का संगम तलाश करता हूँ.

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ख़िजाँ=पतझड़ ,  ईसा-ओ-मरियम=ईसा और मरियम,
अम्नो-प्यार=शांति और प्यार, परचम=ध्वज/झंडा  
 

Tuesday, December 21, 2010

 पीपल पर तीन कुण्डलियाँ 

कुँवर कुसुमेश 

   -१-  
पीपल,पाकड़,नीम,वट,जामुन ,गूलर,आम.
आते हैं ये पेड़ सब,औषधियों के काम.
औषधियों के काम पूर्णतः ये उपयोगी,
इनके सेवन से निरोग होते हैं रोगी.
आजीवन निस्स्वार्थ नियंत्रित करते जल-थल.
पेड़ों में अति प्रमुख कहा जाता है पीपल.
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  -२-
पीपल की उत्पत्ति से, जुड़ी बात ये खास.
कहते हैं इस वृक्ष पर, करते देव निवास.
करते देव निवास अतः ये पूजे जाते.
प्राणवायु दे अधिक प्रदूषण दूर भागते.
पक्षी को आवास,छाँव पथिकों को शीतल-
देते हैं अविराम, अतः पूजित हैं पीपल.
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   -३-  
वायु प्रदूषण को दिया,जिसने तुरत खदेड़.
लुप्त हो रहे आजकल,वे पीपल के पेड़.
वे पीपल के पेड़ ऑक्सीजन दें ज्यादा.
दूर करेंगे सतत प्रदूषण इनका वादा.
मित्र,करो पीपल के पेड़ों का संरक्षण.
अगर चाहते आप, दूर हो वायु प्रदूषण.
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Wednesday, December 15, 2010

उम्र भर चलना संभलकर ज़िन्दगी में

 कुँवर कुसुमेश 

देखते जाना बराबर ज़िन्दगी में,
क्या लगा कैसा कहाँ पर ज़िन्दगी में.

दौरे-हाज़िर में हरिश्चंद वो हुआ जो,
झूठ बोला है सरासर ज़िन्दगी में.

दुश्मनी इन्सान की फ़ितरत में शामिल,
दोस्ती किसको मयस्सर ज़िन्दगी में.

ये मुसीबत चल के ख़ुद आई नहीं है,
तुम इसे लाये हो ढोकर ज़िन्दगी में.

एक पल को ही दिला पाता है राहत,
हुस्ने-जानां का तसव्वर ज़िन्दगी में.

हाँ,किताबों में 'कुँवर'सच ही लिखा है,
उम्र भर चलना संभलकर ज़िन्दगी में.
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दौरेहाज़िर-वर्तमान समय 
हुस्नेजानां-महबूब का सौन्दर्य