Thursday, March 28, 2013

ज़ुल्म होने न दें ग़रीबों पर..........



-कुँवर कुसुमेश 

फ़र्ज़ बनता है ये अदीबों पर. 

ज़ुल्म होने न दें ग़रीबों पर. 

इब्ने-मरियम की तर्ज़ पर चाहे,

झूल जाना पड़े सलीबों पर. 
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शब्दार्थ:
अदीबों=साहित्यकारों,
इब्ने-मरियम=मरियम का बेटा/ईसा मसीह 
सलीब=सूली

Monday, March 11, 2013

उठाई तुमने कि हमने दिवार क्या जाने .


कुँवर कुसुमेश 

तड़पता आदमी सब्रो-क़रार क्या जाने .
जो नफ़रतों में पला हो वो प्यार क्या जाने .

चमन की बात ही करना है तो चमन से करो,
ख़िज़ाँ , ख़िज़ाँ है महकती बहार क्या जाने .

दिलों के बीच में उठती दिखाई देती है,
उठाई तुमने कि हमने दिवार क्या जाने .

मिले हैं अपने पराये सभी से जिसको फ़रेब,
भरोसा कैसे करे,ऐतबार क्या जाने .

बिखरना,टूटना सीखा है तड़पती शै ने,
ये दिल है ये भला बातें हज़ार क्या जाने .

न जाने दोस्त समझता है या कोई दुश्मन,
करे 'कुँवर' कोई किसमें शुमार क्या जाने .
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Sunday, December 2, 2012



-कुँवर कुसुमेश 


कुछ दिन ही इस साल के,सिर्फ रह गए शेष।

मँहगाई  हावी रही,बदल बदल कर भेष।।

बदल बदल कर भेष,जिंदगी नरक बना दी।

और गैस की किल्लत,ने तो धूम मचा दी।।

इसके कारण हुआ, है जीना नामुमकिन ही।

झेलो जी यह साल,बचे हैं अब कुछ दिन ही।।  

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Monday, November 12, 2012

दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें



वो मुफलिसी में था तैयार ख़ुदकुशी के लिए।

कि उसका रो रहा बच्चा है फुलझड़ी के लिए।

बहुत गरीब था  वो ,कुछ नहीं खरीद सका,

बस अपने दिल को जलाया है रौशनी के लिए।

-कुँवर कुसुमेश 

दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें।

Friday, November 2, 2012

उफ़......................



-कुँवर कुसुमेश 


उधर अपनी सरकार मंहगाई वाली .
इधर पास आने लगी  है दिवाली .

मियाँ , गैस ने तो नरक कर दिया है,
कई घर में देखो सिलिंडर है खाली .

समझ में मेरे आज तक है न आया,
कि ये किस जनम की कसर है निकाली . 

यही होगा इस देश में जब चुनोगे-
इलेक्शन में हर बार गुंडे-मवाली .

'कुँवर' की दुआ आप सब के लिए है,
रहे घर में बरकत,मिटे तंगहाली .
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