Thursday, April 17, 2014




मोदी और केजरी की टक्कर है ऐसा लगता है। 



क्यों भाई,ये तो बतलाओ तुमको कैसा लगता है?



कांग्रेस की हालत अबकी बेहद पतली लगती है ,



मंहगाई ने ध्वस्त कर दिया इनको ऐसा लगता है। 


-कुँवर कुसुमेश

Thursday, April 10, 2014

क्या वोट कि खातिर ये कहना ठीक है ?



रंजो-ग़म यारों किसी हद तक ही सहना ठीक है। 

और नेताओं को अपने हद में रहना ठीक है। 

उनकी ये ख़्वाहिश है कि रैपिस्ट को फाँसी न हो,

ऐ खुदा, क्या वोट कि खातिर ये कहना ठीक है  ?

-कुँवर कुसुमेश 

Tuesday, April 8, 2014

इम्दाद लो पेड़ों से



गर्मी में अगर बचना है लू के थपेड़ों से,

दौराने-सफ़र रुक कर इम्दाद लो पेड़ों से। 


कुँवर कुसुमेश

Wednesday, March 19, 2014

गर्मी में........................


गर्मी में बरतें बहुत,सावधानियाँ आप।

धीरे-धीरे बढ़ रहा,भू मंडल का ताप।। 

                 -कुँवर कुसुमेश 

Saturday, March 15, 2014

रंगे-पुते दिखने लगे............


होली के त्यौहार पर,ज़बरदस्त संयोग। 
रंगे-पुते दिखने लगे,मुझको सारे लोग।। 

होली की हार्दिक शुभकामनायें 

कुँवर कुसुमेश 

Sunday, March 9, 2014

कीचड़ रहे उछाल.......



एक दूसरे पर सभी,कीचड़ रहे उछाल। 

ऊपर वाले इस तरफ,एक नज़र तो डाल।।

-कुँवर कुसुमेश 

Wednesday, March 5, 2014

इलेक्शन का दौर आया है............


लीजिये फिर से इलेक्शन का दौर आया है। 

वोटरों के लिए उलझन का दौर आया है। । 

सैकड़ों आ रहे उम्मीदवार फिर दागी ,

राम के देश में रावन का दौर आया है। । 

-कुँवर कुसुमेश