Kunwar Kusumesh
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Friday, June 5, 2015
सभ्यता गई..........................
आगे बढ़ती पीढ़ी अपने-अपने ही रास्ता गई।
पिछली पीढ़ी से क्या लेना दुनिया को ये बता गई।
कल तक तो सभ्यता के कारण भारत का सर ऊँचा था,
बॉय फ्रेंड और गर्ल फ्रेंड के चक्कर में सभ्यता गई। ।
-कुँवर कुसुमेश
Saturday, April 25, 2015
ज़लज़ला
मतलबी इंसान है मतलब में अपनी मुब्तला।
बारहा पर्यावरण को चोट पहुँचता चला।।
इसमें क़ुदरत का ज़रा भी दोष हो ऐसा नहीं,
आदमी की भूल का परिणाम है ये ज़लज़ला।।
-कुँवर कुसुमेश
Tuesday, April 14, 2015
बरबाद फसलें.........................
कई दिन से जारी लगातार बारिश।
ये गर्मी के मौसम में खूंखार बारिश।
हुई जा रही अबकी बरबाद फसलें,
अजी कब रुकेगी धुआँधार बारिश।।
-कुँवर कुसुमेश
Tuesday, March 31, 2015
अजीब चीज़ बनाई है व्हाट्स अप...............
हर आदमी मोबाइल की माला रहा है जप।
घर के ज़रूरी काम भी होने लगे हैं ठप।।
कैसे सुबह से शाम हुई कुछ पता नहीं,
ऐसी अजीब चीज़ बनाई है व्हाट्स अप।।
-कुँवर कुसुमेश
Monday, March 16, 2015
वाट्स ऐप-युग
मिनटों में हो
वाइरल,मन की हर इक बात।
वाट्स ऐप-युग में मिली,सबको ये सौगात।।
-कुँवर कुसुमेश
Saturday, March 14, 2015
जाड़ा कब तक है.........................
आधा मार्च खत्म है फिर भी ठंडक है।
अब कहना मुश्किल है जाड़ा कब तक है।।
लेकिन अबकी फूल खिले हैं अति सुन्दर,
अबकी हरियाली तो यार चकाचक है।।
-कुँवर कुसुमेश
Thursday, March 5, 2015
कानपुर की पत्रिका "हमारा शहर" मार्च 2015 अंक में प्रकाशित "होली" पर मेरे दोहे
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