Wednesday, January 22, 2014

फिर से ठंडक, बरस रहा है पानी भी


फिर से ठंडक, बरस रहा है पानी भी। 
              
             जाड़ा कर डालेगा क्या मनमानी भी ?               

ठिठुर रहे हैं लाखों ठंडक में लेकिन,

दुनिया है इस मौसम की दीवानी भी।।  

-कुँवर कुसुमेश 

Monday, January 13, 2014

AAP


घड़ा फोड़ दो उनके अब पाप का। 
गया वक़्त दुःख और संताप का।।  
सही वक़्त पर लो सही फैसला , 
समय आ रहा दोस्तों AAP का।।
-कुँवर कुसुमेश 

Friday, November 8, 2013

चलन ई-मेल का


--कुँवर कुसुमेश

हो गया मँहगा सफ़र अब रेल का। 

दाम फिर बढ़ने लगा है तेल का।।  

चिट्ठियां इतिहास बनती जा रही हैं ,

आ गया जब से चलन ई-मेल का।। 

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Friday, November 1, 2013

दीवाली के पर्व पर,बरस रहा है नूर..........................


-कुँवर कुसुमेश

दीवाली के पर्व पर,बरस रहा है नूर.
अहंकार तम का हुआ,फिर से चकनाचूर.

अन्यायी को अंत में,मिली हमेशा मात.
याद दिलाती है हमें,दीवाली की रात.

घर घर पूजे जा रहे,लक्ष्मी और गणेश.
पावन दीवाली करे,दूर सभी के क्लेश.

दीवाली का पर्व ये, पुनः मनायें आज.
और पटाखों से बचे,अपना सकल समाज।।

यश-वैभव-सम्मान में,करे निरंतर वृद्धि.
दीवाली का पर्व ये,लाये सुख-समृद्धि.
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शब्दार्थ: नूर=प्रकाश 

Thursday, October 24, 2013

डेंगू फीवर

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कुँवर कुसुमेश 
डेंगू फीवर आजकल,सचमुच बड़ा विचित्र।
प्लेट-लेट गिरती बहुत,तेजी से है मित्र। । 
तेजी से है मित्र,जान संकट में डाले। 
उल्टी संग बुखार,न संभले,कौन संभाले ? 
कीवी के संग अर्क, पपाया-पत्ती पीकर।  
करते सब कंट्रोल,आजकल डेंगू फीवर। 
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Friday, September 13, 2013

हिंदी दिवस




-कुँवर कुसुमेश 


एक ऊँची उड़ान हिंदी है. 

देश की आन-बान हिंदी है. 

जो सभी के दिलों में घर कर ले,

ऐसी मीठी ज़ुबान हिंदी है.


हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनायें