Wednesday, January 22, 2014
Monday, January 13, 2014
Tuesday, December 31, 2013
Friday, November 8, 2013
Friday, November 1, 2013
दीवाली के पर्व पर,बरस रहा है नूर..........................
-कुँवर कुसुमेश
दीवाली के पर्व पर,बरस रहा है नूर.
अहंकार तम का हुआ,फिर से चकनाचूर.
अन्यायी को अंत में,मिली हमेशा मात.
याद दिलाती है हमें,दीवाली की रात.
घर घर पूजे जा रहे,लक्ष्मी और गणेश.
पावन दीवाली करे,दूर सभी के क्लेश.
दीवाली का पर्व ये, पुनः मनायें आज.
और पटाखों से बचे,अपना सकल समाज।।
यश-वैभव-सम्मान में,करे निरंतर वृद्धि.
दीवाली का पर्व ये,लाये सुख-समृद्धि.
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शब्दार्थ: नूर=प्रकाश
Thursday, October 24, 2013
Friday, September 13, 2013
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